Chouparan (Hazaribagh): एनजीटी के प्रतिबंध और प्रशासनिक सख्ती के दावों के बावजूद चौपारण प्रखंड में अवैध बालू खनन का नेटवर्क लगातार सक्रिय बना हुआ है. स्थिति यह है कि रात होते ही नदी घाटों से बालू उठाव शुरू हो जाता है और तड़के सुबह तक ट्रैक्टरों के काफिले अलग-अलग इलाकों तक आपूर्ति करते नजर आते हैं.
स्थानीय लोगों के अनुसार यह पूरा कारोबार अब एक संगठित व्यवस्था के तहत चल रहा है, जिसमें नदी घाटों से लेकर परिवहन मार्गों तक एक तय नेटवर्क काम करता है. भगहर स्थित ढाढर नदी, बराकर नदी सहित सीमावर्ती इलाकों और बिहार से सटे घाटों को मुख्य स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है.
ग्रामीणों का कहना है कि बालू माफियों ने निगरानी और बचाव की मजबूत रणनीति तैयार कर ली है. ट्रैक्टरों के आगे बाइक सवार युवकों को लगाया जाता है, जो रास्ते में किसी भी जांच या पुलिस गतिविधि की जानकारी तुरंत आगे पहुंचाते हैं. इससे कई बार कार्रवाई शुरू होने से पहले ही वाहन सुरक्षित निकल जाते हैं.
इस अवैध गतिविधि का असर अब आम जनजीवन पर भी दिखने लगा है. रातभर ट्रैक्टरों की आवाजाही से गांवों में शांति भंग हो रही है, वहीं सड़कों पर भारी वाहनों के कारण दुर्घटना का खतरा भी बढ़ गया है. ग्रामीणों का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी और असंतोष बढ़ रहा है.
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार अवैध बालू खनन से नदियों के प्राकृतिक प्रवाह, जलस्तर और पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है. अनियंत्रित दोहन से भविष्य में जल संकट की स्थिति और गंभीर होने की आशंका है.
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