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गर्ल्स हॉस्टल का लिया जायजा, आवास और भोजन की देखी व्यवस्था
टीम के सदस्यों ने हजारीबाग मेडिकल कॉलेज अस्पताल की भी जांच की. उन्होंने विभिन्न विभागों का निरीक्षण किया. इसके साथ ही झील परिसर के निकट मेडिकल कॉलेज का भी निरीक्षण किया गया. टीम ने गर्ल्स हॉस्टल में जा कर रहने और खाने की व्यवस्था की जांच की. इसके बाद विभिन्न लेक्चरर रूम का भी निरीक्षण किया. इस दौरान वहां प्रशिक्षु डॉक्टरों से भी सुविधाओं की जानकारी ली. हजारीबाग मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन के पदाधिकारी, प्रिंसिपल और सुपरिटेंडेंट भी जांच के दौरान उपस्थित रहे.alt="" width="600" height="340" />
तीसरे बैच में 100 छात्रों के नामांकन का दिया था अप्रूवल
नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने 10 अक्तूबर को शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के प्रिंसिपल सह डीन को पत्र के माध्यम से तीसरे बैच में 100 छात्रों के नामांकन का अप्रूवल दे दिया था. इस अप्रूवल के बाद तीसरे बैच में 100 छात्रों के नामांकन का रास्ता प्रशस्त हो गया था. यह एनएमसी का शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज को तीसरा रीन्यूअल है और चौथा बैच है. एनएमसी ने 100 छात्रों के नामांकन का अप्रूवल सिर्फ एक वर्ष के लिए पिछले विजिट में दिया था. इसके लिए कॉलेज प्रबंधन से एफिडेविट भी लिया गया था. एनएमसी की टीम ने लगातार मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल का निरीक्षण करते हुए कई खामियों को गिनाते हुए उसे पूरा करने का निर्देश देता रहा है. इसे भी पढ़ें:धनबाद:">https://lagatar.in/dhanbad-public-distribution-vendors-strike-begins-against-centres-food-policy/">धनबाद:केंद्र की खाद्य नीति के खिलाफ जन वितरण विक्रेताओं की हड़ताल शुरू
सेकेंड बैच में अप्रूवल नहीं होने के कारण नामांकन पर लगा दी गई थी रोक
पहले बैच में 100 छात्रों का नामांकन हुआ था. इसमें एक छात्रा की एक घटनाक्रम में मौत हो गई थी. इनमें 99 छात्र बचे थे. सेकेंड बैच में एप्रूवल नहीं होने के कारण नामांकन रोक दिया गया था. इसके बाद दो बैच में 100-100 की संख्या में छात्रों ने एडमिशन लिया गया था और उनकी पढ़ाई अभी चल रही है. फोर्थ रीनुअल के लिए जांच की जा रही है, जिसमें 100 छात्रों का नामांकन सुनिश्चित होना है.जांच के खेल में अस्पताल की व्यवस्था फेल : सीटू
alt="" width="600" height="360" /> शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में नेशनल मेडिकल काउंसिल की टीम जांच करने पहुंची. इस पर सीपीएम नेता गणेश कुमार सीटू ने सवाल उठाते हुए कहा कि इसके पहले भी कई राउंड की जांच मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (नेशनल मेडिकल काउंसिल) करके जा चुकी है पर अस्पताल की व्यवस्था में सुधार हो ही नहीं रहा है. आज भी लाखों रुपए की चिकित्सीय मशीन स्टोर की शोभा बढ़ा रही है. ब्लड बैंक और लैब की स्थिति मानक से बहुत नीचे है. वार्ड ब्वॉय एवं पारा मेडिकल स्टाफ की भयंकर किल्लत है. डॉक्टर तो है इनका ड्यूटी का रोस्टर भी बनता है पर आधे से अधिक डॉ गायब रहते हैं. जब जांच टीम आती है, तो एक दो दिनों के लिए बाहरी व्यवस्था चकाचक कर दी जाती है ताकि जांच टीम के आंख में धूल झोंका जा सके और जांच टीम के जाने के बाद फिर वही पुरानी बातें आरंभ हो जाती हैं.

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