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हजारीबाग: करोड़ों के अपार्टमेंट में सुरक्षा के नहीं पुख्ता इंतजाम, लोग परेशान

Pramod Upadhyay 
Hazaribagh: करोड़ों के अपार्टमेंट और उसमें खानापूर्ति के नाम पर लगाए गए कमजोर व बेढंगे सीसीटीवी कैमरे. यह कैमरे किसी काम के नहीं. अपार्टमेंट में होनेवाली हलचल और हर गतिविधि को कैच करने का पावर भी नहीं. कई अपार्टमेंट में तो यह सीसीटीवी कैमरा भी मौजूद नहीं है. अगर कोई घटना घट गई, तो पुलिस को छानबीन में परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
फ्लैट में रहनेवाले लोगों का कहना है कि हर अपार्टमेंट में बिल्डर अच्छे से हर एंगल में सीसीटीवी कैमरा लगाते, तो अपराध पर अंकुश लगता. चूंकि कई बार विभिन्न कार्यों के बोझ तले दबा एक गार्ड हर वक्त ड्यूटी पर तैनात रहकर हर गतिविधि पर नजर नहीं रख पाता है. एक सिक्योरिटी गार्ड के भरोसे 75 फ्लैट में करीब 400 लोग रहते हैं. करीब 50 से 75 लाख में एक फ्लैट बेचे जा रहे हैं और हर माह मेंटेनेंस चार्ज के नाम पर 1500 रुपए लगता है, तो फिर अपनी सुरक्षा की गारंटी लोगों को चाहना लाजिमी है.
दरअसल हजारीबाग जिले में इन दिनों अपार्टमेंट और फ्लैट कल्चर तेजी से बढ़ता जा रहा है. लगातार बड़े-बड़े अपार्टमेंट बनाए जा रहे हैं और फ्लैट बेचे जा रहे हैं. इसमें बिल्डरों की मोटी कमाई होती है. लेकिन फ्लैट में रहनेवाले लोगों के लिए सुविधाएं नदारद रहती हैं. फ्लैट खरीदारी के पहले तो खूब सब्जबाग दिखाया जाता है. लेकिन फ्लैट की चाबी पकड़ने के बाद गुहार लगाते दिन गुजरता रहता है. फ्लैट खरीदने के पहले खूब सपने दिखाए जाते हैं. अपार्टमेंट की तारीफ में खूब कसीदे गढ़े जाते हैं. टाइल्स, मार्बल एवं सिक्योरिटी गार्ड के साथ बच्चों के लिए पार्क और स्वीमिंग पुल तक मनोरंजन और सुरक्षा के साधन बताए जाते हैं.
मॉल-मार्ट तक की सुविधा देने की बात करते हैं. लेकिन सबकुछ तब फना हो जाता है, जब वे फ्लैट में शिफ्ट कर जाते हैं. अपने ही फ्लैट में दरवाजा बंद कर रहना पड़ता है. बच्चों को नीचे भेजने तक में हिचकिचाते हैं. कब पानी सप्लाई ठप हो जाए, कब बिजली कट जाए और कब लिफ्ट बंद हो जाए, कहना मुश्किल है. इसके लिए सोसाइटी से गुहार लगाते रहें. कई अपार्टमेंट में तो सोसाइटी भी मृतप्राय है. कहने का अर्थ है कि फ्लैट बेचने के बाद बिल्डर को वहां रहनेवालों से कोई मतलब ही नहीं रहता. कौन अपराधी और कौन परिजन, बिल्डर को कोई लेना-देना नहीं. सिर्फ अपना व्यवसाय चलाते हैं और जब अपार्टमेंट में कोई घटना घट जाती है, तो वह बिल्डर अपना हाथ खड़ा कर देते हैं. कई ऐसे मामले हैं, जिससे सीसीटीवी की महत्ता को समझा जा सकता है.
केस-1 : छह साल पहले खजांची तालाब के पास बने शिवम अपार्टमेंट में दिल दहला देनेवाली घटना माहेश्वरी परिवार के छह लोगों की लाश बरामद की गई थी. कोई उसे हत्याकांड, तो कोई आत्महत्या का मामला करार देता है. आज छह साल बाद भी पुलिस खाली हाथ है और अब तो मामला सीआईडी को सुपुर्द कर दिया गया है. वहां अपार्टमेंट में लगे सीसीटीवी से वारदात से संबंधित कोई सबूत हासिल नहीं हुए. तत्कालीन अनुसंधानकर्ता रामाशंकर मिश्रा (अब दिवंगत) ने तब कहा था कि अगर वहां हर एंगिल से पावरफुल सीसीटीवी कैमरा लगा रहता, तो आज पुलिस के हाथ कुछ सबूत हासिल हुए होते. छानबीन में मामला आगे बढ़ सकता था और केस को अच्छी तरह खंगाला जा सकता था.
केस-2 : एनटीपीसी की आउटसोर्सिंग कंपनी त्रिवेणी सैनिक के एजीएम गोपाल सिंह की हत्या वर्ष 2018 में जुलू पार्क स्थित अपार्टमेंट के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. वह अपार्टमेंट से ही निकले थे. वहां अपार्टमेंट में सीसीटीवी कैमरा नहीं था. इस वजह से पुलिस को काफी माथापच्ची करनी पड़ी थी. काफी दिनों बाद आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे से कुछ सबूत हाथ लगे और फिर पुलिस अपने सूत्रों से मुजरिम तक पहुंच पायी थी.
केस-3 : मटवारी के एक अपार्टमेंट स्थित फ्लैट में एक सेवानिवृत्त डीएफओ के बेटे ने अपनी पत्नी की हत्या कर उसे तीन दिन तक रखे हुए थे. बाद में उसके खराब होते शव को बिहार के औरंगाबाद में फेंक आया था. तब भी पुलिस को छानबीन करने में सीसीटीवी कैमरे के नहीं होने से कोई मदद नहीं मिल पायी थी. खुद सेवानिवृत्त डीएफओ ने जब बेटे की करतूत का राज पुलिस के समक्ष खोला था, तब रहस्य से पर्दा उठ पाया था.

कई हॉस्टल और लॉज में भी हैं यही हालात

शहर के दर्जनों खासकर कोर्रा, मटवारीजुलू पार्क क्षेत्रों में बिना रजिस्ट्रेशन के चलाए जा रहे हॉस्टल और लॉज के भी यही हालात हैं. न ढंग का सीसीटीवी कैमरा और न सिक्योरिटी गार्ड. चंद पैसों की लालच में मकान मालिक लोगों को किराए पर दे देते हैं. गर्ल्स हॉस्टल तक में यही हालात हैं. कौन आता है, कौन क्या करता है किसी से कोई मतलब नहीं. ऐसे ही एक लॉज में कोर्रा थाना पुलिस ने छापेमारी की थी, जहां सेक्स रैकेट का खुलासा हुआ था. वहीं कई बार अफीम, ब्राउन शुगर व कॉरेक्स भी बरामद किए जा चुके हैं.

क्या कहते हैं अपार्टमेंट के सिक्योरिटी गार्ड

इस संबंध में एक अपार्टमेंट में कार्यरत सिक्योरिटी गार्ड और केयरटेकर से पूछे जाने पर कहा कि इस अपार्टमेंट में 75 फ्लैट हैं, जो पूरे बिके हुए हैं. इसमें तीन सिक्योरिटी गार्ड काम करते हैं, जिसमें सबकी अलग-अलग टाइम पर ड्यूटी है. जल्द ही अपार्टमेंट में सीसीटीवी कैमरा लगाया जाएगा. इसकी पूरी जानकारी अपार्टमेंट के मालिक देंगे. केयरटेकर ने बताया कि इसमें 50 से 75 लाख में एक फ्लैट बिका है. इसमें हर फ्लैट वालों को माह में 1500 रुपए मेंटेनेंस चार्ज देना पड़ता है. सुविधाओं के नाम पर जेनरेटर और लिफ्ट है.
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