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हजारीबाग : अब महुआ से शराब नहीं, बनाया जा रहा स्वादिष्ट अचार

Hazaribagh : झारखंड के जंगलों और ग्रामीण इलाकों में महुआ  बहुतायत में मिलता है. ग्रामीण स्तर पर इसका सर्वाधिक इस्तेमाल देशी शराब बनाने में होता है, लेकिन अब महुआ का इस्तेमाल आचार बनाने में भी किया जा रहा है. ( हजारीबाग">https://lagatar.in/category/jharkhand/north-chotanagpur-division/hazaribagh/">हजारीबाग

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महुआ में है कई औषधीय गुण

झारखंड में महुआ का इस्तेमाल सबसे अधिक देसी शराब बनाने में होता है. जिस कारण महुआ बदनाम हो गया है. जबकि कई औषधीय गुण लिया हुआ यह महुआ बहुत ही उपयोगी है. हजारीबाग के चरही थाना क्षेत्र के जरबा गांव कभी महुआ से देसी शराब बनाने के लिए बदनाम था, लेकिन अब यहां बदलाव की बयार बह रही है. इस गांव की जिओ स्वयं सहायता समूह है इस महुआ से स्वादिष्ट अचार बना रही हैं. इसे भी पढ़ें - पटियाला">https://lagatar.in/patiala-60-students-of-national-law-university-corona-positive-hostel-evacuated/">पटियाला

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वर्ल्ड बैंक की सहायता से अचार बनाने का पूरा संयंत्र लगाया गया

हजारीबाग के पुराने सदर ब्लॉक परिसर में इसके व्यवसायिक उत्पादन के लिए वर्ल्ड बैंक की सहायता से अचार बनाने का पूरा संयंत्र लगाया गया है. इसके पहले यह महिलाएं अपने गांव जरबा में ही अचार बनाया करती थीं. धीरे-धीरे इनका यह उत्पाद काफी प्रसिद्ध होता गया और उनके उत्पाद को लोगों ने हाथों हाथ लिया. बाद में इन्हें झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी यानी जेएसएलपीएस से सहायता मिली. जिसके बाद हजारीबाग में एक परिसर दिया गया. जहां अब बड़ी मात्रा में महुआ का अचार बनाया जा रहा है. इसे भी पढ़ें - BIG">https://lagatar.in/big-breaking-bodies-of-five-people-found-together-on-the-banks-of-ganga-ghat-of-buxar/">BIG

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सरकार भी इनकी मदद कर रही- डीसी

हज़ारीबाग़ की उपायुक्त नैंसी सहाय ने बताया कि महिलाओं का महुआ से अचार बनाने का आइडिया यूनिक है. पहले जहां ज़रबा और उसके आसपास के गांव महुआ से देशी शराब बनाने के लिए बदनाम थे. अब यहां की महिलाओं ने इस क्षेत्र को महुआ से अचार बनाने वाला इलाके के रूप में प्रसिद्ध कर दिया है. सरकार भी इनकी मदद कर रही है. आगे भी मार्केटिंग की जो भी समस्या रहेगी, उसे भी हल किया जायेगा. कोशिश रहेगी आस पास के गांव की और महिलाओं को इससे जुड़ा जाये. ताकि ये इस इलाके का एक प्रोडक्ट बन जाये. इसे भी पढ़ें - जम्मू-कश्मीर">https://lagatar.in/earthquake-shook-the-earth-in-jammu-and-kashmir-measured-5-3-on-the-richter-scale/">जम्मू-कश्मीर

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महिलाओं ने आचार बनाकर आमदनी के बढ़ाने का विचार किया

सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि जब ग्रुप की महिलाओं ने आचार बनाकर आमदनी के बढ़ाने का विचार हुआ, तो सबसे पहले इस पर विचार हुआ कि परंपरागत चीजों का ही अचार बनाया जाए या कुछ नया किया जाए.  ताकि उनके प्रोडक्ट को हाथों हाथ खरीदें काफी विचार करने के बाद महुआ पर सहमति बनी. हमारे घरों में पहले इसका उपयोग जानवरों को खिलाने में भी किया जाता था. साथ ही साथ घरेलू उपयोग भी बहुत कम मात्रा में इसका होता था. लेकिन इलाके में इसका इस्तेमाल सबसे अधिक देसी शराब बनाने में होता था. गांव में देसी शराब बनने से सबसे अधिक परेशानी और नुकसान महिलाओं को ही था .क्योंकि इस देसी शराब का सेवन करने के बाद घर के पुरुष  पैसे की बर्बादी करते थे और दूसरा गृहकलह खूब होता था. धीरे-धीरे इन महिलाओं ने महुआ से अचार बनाना शुरू किया और फिर इस इलाके में महुआ का अचार काफी लोकप्रिय होने लगा. आज इनके बनाए प्रोडक्ट ना केवल हजारीबाग में बल्कि जेएसएलपीएस के माध्यम से कई जिलों में सप्लाई किए जा रहे हैं . अब यह महिलाएं एक बड़ा मार्केट तलाश रही है ताकि अपने इस प्रोडक्ट को ऑनलाइन भी बेचा जा सकें. इसके लिए काम किया जा रहा है अगर यह सफल होता है तो फिर झारखंड के हजारीबाग का महुआ का अचार पूरे देश में उपलब्ध हो सकेगा. [wpse_comments_template]

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