प्रशासन जिस जमीन का म्यूटेशन और रसीद काट रहा, बाद में उसी का बाउंड्री गिरा रहा
एक एकड़ जमीन का एग्रीमेंट लेने वाले इंदर गोप का कहना है कि 2014 तक रसीद काटा गया. वहीं कई ऐसे प्लॉट हैं, जिसका हाल तक म्यूटेशन किया गया है और फिर 2022-23 तक रसीद भी काट दिया गया. प्रशासन एक ओर म्यूटेशन और रसीद काट रहा है, वहीं दूसरी ओर बुलडोजर लाकर सरकारी जमीन का हवाला देते हुए बाउंड्री वॉल तोड़ रहा है. इसे भी पढ़ें :आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-bjp-people-counted-achievements-of-9-years-of-central-government/">आदित्यपुर: भाजपाइयों ने केंद्र सरकार की 9 साल की गिनाई उपलब्धियां
प्रशासन पर आरोप है कि गैरमजरूआ खास जमीन को सरकारी कहकर तोड़ दिया
इंदर गोप का कहना है कि उन्होंने पूनम शाहबादी जो जुगल जायसवाल की बेटी हैं उनसे एक एकड़ जमीन एग्रीमेंट पर लिया. इसके एवज में बड़ी रकम भी दी गई. प्रशासन ने गैरमजरूआ खास जमीन को सरकारी कहकर तोड़ दिया. पूनम शहवादी की मां कमला देवी के नाम पर जमीन थी. उनका यह भी कहना है युगल जायसवाल के बड़े बेटे प्रमोद जायसवाल ने हजारीबाग सदर विधायक मनीष जायसवाल को 3 एकड़ 23 डिसमिल जमीन बेचा है. उस जमीन पर किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की गई, क्योंकि वे सफेदपोश हैं.alt="" width="600" height="340" />
प्रशासन की नीयत पर सवाल खड़ा किया
इंदर गोप का कहना है कि लक्ष्मी गृह प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक मनीष जायसवाल ने एक करोड़ 30 लाख 3650 रुपए का डीड कराया. लेकिन उनकी जमीन पर प्रशासन का बुलडोजर नहीं चला. ऐसे कहीं न कहीं प्रशासन की दोहरी नीयत दिख रही है. मामला प्लॉट संख्या 882 का है. युगल जायसवाल जो विधायक मनीष जायसवाल के पिता ब्रजकिशोर जायसवाल के भाई हैं. उनके ही बेटे और बेटी ने दो डीड किया. एक डीड पर कार्रवाई की गई और दूसरे डीड पर मौन धारण कर लिया गया है. ऐसे में प्रशासन की नीयत साफ नहीं दिख रही है.गाढ़ी कमाई से कराई रजिस्ट्री, अब कैसे लौटेगा पैसा
प्रशासन ने प्लॉट नंबर 882 में 19 एकड़ 20 डिसमिल जमीन के कई हिस्से को अतिक्रमण मुक्त कराया है. इनमें से कई ऐसे लोग हैं, जिन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई से छोटे-छोटे प्लॉट की रजिस्ट्री कराई है. ऐसे में अब वे भारी मुसीबत में है कि उनका पैसा कैसे लौटेगा. इसे भी पढ़ें :बेरमो">https://lagatar.in/bermo-bharat-bandh-on-june-15-against-kurmis-st-status-adivasi-sengel-campaign/">बेरमो: कुर्मी को एसटी का दर्जा के खिलाफ 15 जून को भारत बंद: आदिवासी सेंगेल अभियान
मनोज कुमार की भी है अपनी पीड़ा, टूट गया अपना घर का सपना
इसी में एक हैं मनोज कुमार जिनकी मां के नाम पर 2010 में दो कट्ठा जमीन डीड कराया गया और उनकी जमीन भी सरकारी जमीन कह कर अतिक्रमण मुक्त कराया गया है. उनका भी कहना है कि 2014 तक उन लोगों ने रसीद कटाया. दो साल तक जमीन पर बुलडोजर चलवाया और जमीन समतलीकरण किया गया. लेकिन किसी भी पदाधिकारी ने आकर जांच तक नहीं की. इस बार की कार्रवाई से उन लोगों की गाढ़ी कमाई डूब चुकी है. ऐसे में वे लोग क्या करें. उनका यह भी कहना है कि अंचल कार्यालय में जाकर प्रतिबंधित सूची की भी जांच की गई थी. उसमें भी जमीन नहीं थी. लेकिन अब उस जमीन को सरकारी कहा जा रहा है. उन लोगों को नोटिस भी नहीं दिया गया है. ऐसे में वे लोग जो अपना घर का सपना देख रहे थे, वह पूरा नहीं होगा. इसका कारण यहां के पदाधिकारी और बड़े-बड़े भू-माफिया हैं.alt="" width="600" height="400" />
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