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हजारीबाग : महाबली बाबा चौहरमल की जयंती पर निकली शोभायात्रा

सामंती ताकतों से लगातार संघर्षरत रहे बाबा चौहरमल Hazaribagh:  महाबली बाबा चौहरमल की जयंती पर सिरसी के पासवान समाज ने भव्य शोभायात्रा निकाली. इस शोभायात्रा में वार्ड 33 के पार्षद बादशाह राम, करमबीर, जागो राम, कौलेश्वर पासवान, सागर पासवान, सुजीत पासवान, लिपट पासवान, टोमेश पासवान, उमेश पासवान, रामवृक्ष पासवान, बाली पासवान, सुबोध पासवान इत्यादि सैकड़ों महिला पुरुष एवं नौजवान शामिल थे. बता दें कि चौहरमल का जन्म बिहार के मोकामा अंचल क्षेत्र के शंकरवाड़ टोला में हुआ था. तब इस क्षेत्र को मगध के नाम से जाना जाता था. उनका जन्म दुसाध ज़ाति के एक किसान परिवार में 4 अप्रैल 1313, तदनुसार चैत्र पूर्णिमा को हुआ था. इनके पिता बंदीमल और माता रघुमती थी. इनका कर्मस्थान मोकामा ताल के चाराडीह में था औऱ इससे 14 किलोमीटर दूर तुरकैजनी गांव में इनका ननिहाल था. समाज हित के लिए ब्राह्मणी और सामंती ताकतों से लगातार संघर्षरत रहने के कारण इन्हें चारडीह,-तुरकैजनी भाग दौड़ करना पड़ता था. इनका ससुराल मोकामा ताल के खुटहा (बड़हिया) गांव में था. इसे भी पढ़ें-जीता">https://lagatar.in/if-we-win-we-will-become-the-voice-of-youth-in-lok-sabha-sanjay-mehta/">जीता

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चौहरमल को बादशाह ने दिया था 100 बिगहा जमीन

चौहरमल सामंती दमन के विरुद्ध विद्रोह के प्रतीक थे. उन्होंने चाराडीह में सामंतो द्वारा की गई आर्थिक नाकाबंदी का संगठन बना कर कड़ा मुकाबला किया और अपने लोगों को संकट से बचाया. वे चाराडीह में सामूहिक खेती-किसानी शुरू कर उस इलाके के लोगों की आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति करते थे. गियासुद्दीन मुहम्मद बिन तुगलक ने चौहरमल को 100 बिगहा खेती योग्य भूमि का पट्टा दिया था, जिस पर सामंतों की नज़र गड़ी थी. चौहरमल ने सामंतों के अत्याचार से लोहा लेने हेतु चाराडीह को युद्ध कला ज्ञान हासिल करने का प्रशिक्षण केंद्र बनाया था, जिसमें वे अस्त्र संचालन का प्रशिक्षण देते थे. इसे भी पढ़ें-कांग्रेस">https://lagatar.in/congress-released-the-list-of-star-campaigners-for-the-fifth-phase-of-jharkhand/">कांग्रेस

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