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हजारीबागः ब्रह्मस्थान मंदिर नवनिर्माण की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन

Hazaribagh : जिला परिषद चौक स्थित ढहाए गए ब्रह्मस्थान मंदिर के नवनिर्माण की मांग को लेकर बुधवार को शहरवासियों ने धरना-प्रदर्शन किया. लोगों ने मंदिर को ढहाए जाने के खिलाफ संवेदक के प्रति विरोध जताया और चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी. दरअसल, इस मंदिर के प्रति लोगों में गहरी आस्था है. वहां नगर निगम का भवन बनाया जा रहा है, और इसी क्रम में मंदिर को ढहा दिया गया. लोगों का कहना है कि मायापुर से वृंदावन जाने के क्रम में चैतन्य महाप्रभु हजारीबाग आए थे, और जिला परिषद चौक स्थित ब्रह्म स्थान मंदिर में रात्रि विश्राम किया था. यह मात्र एक भूमि का टुकड़ा नहीं, यहां महाप्रभु के चरण पड़े थे. मंदिर को पांच डिसमिल जमीन भी यहां मिली थी. मंदिर को साजिश के तहत ढहा कर अगर संवेदक जमीन को हड़पना चाहता है, तो यह उसकी भूल होगी. मंदिर तो बनेगा और संवेदक को ही बनाना होगा. संवेदक के खिलाफ आयोजित एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन में शामिल समाज के विभिन्न लोगों ने यहां जोरदार हुंकार भरी. इसे पढ़ें- ट्रैफिक">https://lagatar.in/high-court-took-cognizance-of-traffic-jam-in-charge-traffic-sp-and-dsp-appeared/">ट्रैफिक

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इससे पूर्व आर्ष कन्या गुरुकुल की बेटियों ने वेद मंत्र पढ़कर धरना प्रारंभ किया. आर्य समाज के आचार्य कौटिल्य ने धर्म की शिक्षा दी और धर्म के लिए लड़ने का प्रेरणा भी दी. दरअसल, हजारीबाग जिला परिषद चौक स्थित ऐतिहासिक ब्रह्म स्थान मंदिर को जान बूझकर संवेदक ने मंदिर के पीछे ड्रिलिंग कर दरार करा दिया. उसके बाद मंदिर को ढहा दिया गया. हंगामे को देखते हुए संवेदक ने मंदिर बना देने की बात समिति को कही थी. परन्तु चार माह के बाद अब संवेदक मंदिर को बनाने से पीछे हट रहा है. इसी विषय को लेकर मंदिर समिति के नेतृत्व में नवनिर्माण को लेकर मुहिम शुरू हुई है. बुधवार को मंदिर परिसर के बाहर सड़क पर धरना-प्रदर्शन किया गया. प्रदर्शन में समाज के विभिन्न वर्ग के लोग, सामाजिक संगठन बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, आरएसएस, विद्यार्थी परिषद, हिंदू युवा संघ, नव झारखंड फाउंडेशन सहित अन्य शामिल हुए. कार्यक्रम का संचालन बजरंग दल के जिला संयोजक प्रशांत सिंह ने किया. वक्ताओं ने चेतावनी दी और कहा कि अगर मंदिर का निर्माण नहीं होता है, तो भवन का भी निर्माण नहीं होगा. इसे भी पढ़ें- JPSC:">https://lagatar.in/jpsc-7th-to-10th-civil-services-exam-cutoff-marks-released/">JPSC:

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संवेदक दिखाते हैं कट्टा, पौराणिक है मंदिर की मान्यता : हर्ष

समिति का नेतृत्व कर रहे हर्ष अजमेरा व समिति सदस्यों ने कहा कि ब्रह्मस्थान 200 साल से भी अधिक पुराना मंदिर है. 1912 ई. में मंदिर का पुनर्निर्माण कराया गया था. मान्यता यह भी है कि ब्रह्म ऋषि ने यहां विश्राम किया था. अजमेरा ने कहा कि श्रद्धालुओं ने संवैधानिक तरीके से धरना-प्रदर्शन किया है. साथ ही मंदिर निर्माण में संवेदक की ओर से किए जा रहे व्यवधान उत्पन्न को दूर करते हुए पुनर्निर्माण के लिए सहयोग करने की अपील की है. उन्होंने बताया कि समिति के सदस्यों को संवेदक ने कट्टा दिखाकर डराने की कोशिश की है. धरना के पूर्व आंदोलन से संबंधित ज्ञापन उपायुक्त, नगर आयुक्त और एसडीओ को सौंपा गया था. [wpse_comments_template]

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