मानदेय पर रोक लगा जाने के बाद दिव्यांग शिक्षिका सात वर्षों से लगा रहीं विभाग का चक्कर सांसद की अनुशंसा भी कर दी गई अनसुनी शिक्षक संघ ने उच्चाधिकारियों से लगाई इंसाफ की गुहार Amarnath Pathak Hazaribagh : जिस हिंदी विद्यापीठ देवघर के सर्टिफिकेट को झारखंड सरकार सही बता रही है, उसी से इंटरमीडिएट के सर्टिफिकेट को बीइइओ ने फर्जी बताकर पारा शिक्षिका का मानदेय रोक दिया है. यह पारा शिक्षिका सुमित्रा कुमारी हजारीबाग के कटकमसांडी स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय तोरार शाहपुर की हैं, जो पांव से दिव्यांग हैं. उन्होंने वर्ष 2010 में हिंदी विद्यापीठ देवघर से इंटरमीडिएट की हैं. सरकार के सचिव प्रवीण कुमार टोप्पो ने 15 जून को पत्र जारी कर बताया है कि 26 जून 2014 के बाद से हिंदी विद्यापीठ देवघर से शिक्षा लेनेवालों के शैक्षणिक प्रमाण पत्र वैध नहीं माने जाएंगे. लेकिन शिक्षिका सुमित्रा कुमारी ने मानक तिथि से चार वर्ष पूर्व वहां से इंटरमीडिएट किया है. इसे भी पढ़ें :बांग्लादेशी">https://lagatar.in/how-did-the-governor-accept-the-words-of-a-leader-on-bangladeshi-infiltration-supriyo/">बांग्लादेशी
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शिक्षिका के सर्टिफिकेट को फर्जी बताने का औचित्य नहीं : मनोज कुमार
इस आशय का पत्र आरडीडीई को लिखते हुए झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा है कि शिक्षिका का सर्टिफिकेट फर्जी करार देने का कोई औचित्य नहीं है. शिक्षिका पांच जनवरी 2004 में मैट्रिक प्रमाण पत्र के आधार पर बहाल की गई थीं. चार नवंबर 2015 को बीइइओ ने उनसे इंटर का प्रमाण पत्र मांगा. उन्होंने जब हिंदी विद्यापीठ देवघर का प्रमाण पत्र दिया, तो उसे फर्जी करार दे दिया गया. फिर उनका मानदेय तत्कालीन बीइइओ ने रोक दिया. उसके बाद उन्होंने डीएसई और डीसी से गुहार लगाई, लेकिन किसी ने संज्ञान नहीं लिया. इसे भी पढ़ें :सर्पदंश">https://lagatar.in/rims-alert-on-increasing-cases-snakebite-additional-anti-snake-venom-will-be-purchased/">सर्पदंशके बढ़ते मामलों पर रिम्स सतर्क, अतिरिक्त एंटी स्नेक वेनम की होगी खरीदारी
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