सदर प्रखंड के सरौनी में चल रहा आरइओ से कामन योजना का लगाया गया बोर्ड, न बनाया गया है डायवर्सन या वैकल्पिक मार्ग 10 किमी अच्छी सड़क का हो रहा नवनिर्माण और छोड़ दिया गया है छह किमी बदहाल सड़क Vishmay Alankar Hazaribagh : हजारीबाग के सदर प्रखंड स्थित चुटियारो पंचायत के सरौनी में सड़क बनाने का अलग ही गोरखधंधा चल रहा है. यहां चकाचक सड़क को तोड़ कर पांच करोड़ की राशि से उसे फिर से बनाया जा रहा है, वहीं बदहाल सड़क पर किसी का ध्यान नहीं है. हुटपा से डुमर सरौनीखुर्द होते हुए चंदवार तक करीब 10 किमी चकाचक सड़क का फिर से निर्माण आरइओ की ओर से किया जा रहा है. दिलचस्प बात यह है कि इस सड़क के बने महज ढाई साल ही हुए हैं. यह ‘शुभम संदेश’ नहीं, सरौनी के ग्रामीण ही कह रहे हैं. साथ ही ग्रामीण यह भी गुहार लगा रहे हैं कि जितनी राशि चकाचक सड़क को उजाड़ कर फिर से बनाने में खर्च की जा रही है, उतने पैसे में बदहाल सड़क चलने-फिरने लायक हो जाती. वहीं चकाचक सड़क के नवनिर्माण स्थल पर न तो योजना से संबंधित बोर्ड लगाया गया है और न ही ग्रामीणों की सुविधाओं का ख्याल रखा गया है. इसे भी पढ़ें :हजारीबाग">https://lagatar.in/hazaribagh-vibhavi-bans-law-college-students-from-filling-examination-form/">हजारीबाग
: विभावि ने लॉ कॉलेज के छात्रों को परीक्षा फॉर्म भरने पर लगाई रोक
: क्रांतिकारी आदिवासी महासभा ने निकाली रैली, एसडीओ को सौंपा पत्र
: विभावि ने लॉ कॉलेज के छात्रों को परीक्षा फॉर्म भरने पर लगाई रोक
बालू कहां से आ रहा, उठ रहा सवाल
सरौनी से गुरहेत जानेवाली सड़क को ब्लॉक कर यह रोड बनाया जा रहा है. वहां न कोई डायवर्सन और न कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई है. अगर किसी को जल्दबाजी में अस्पताल या अन्य कहीं जाना पड़े, तो वह किस मार्ग से जाएगा, इसके लिए भी जगह नहीं छोड़ी गई है. सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि सड़क निर्माण में बालू कहां से आ रहा है, जबकि एनजीटी के तहत बालू उठाव पर रोक लगाई गई है. ग्रामीणों का कहना है कि पास ही की सेवाने और अंधारू नदी से अंधाधुंध बालू सरकारी काम के लिए ही उठाए जा रहे हैं. इधर केशुरा मोड़ से सरौनी तक छह किमी बदहाल सड़क पर किसी का ध्यान नहीं है. इस रोड में गड्ढे ही गड्ढे हैं और वर्षों से यह पथ बदहाल है.पथ निर्माण पर उठाए जा रहे सवाल
सरौनी के सामाजिक कार्यकर्ता विनय सिंह उर्फ टुनटुन सिंह कहते हैं कि हुटपा से चंदवार तक चकाचक पथ के निर्माण की जरूरत क्यों पड़ी. इसका टेंडर कैसे पास कर दिया गया. न योजना का बोर्ड लगा है और न ग्रामीणों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है. रोड ब्लॉक कर काम कराया जा रहा है. काम करा रहे पदाधिकारी से पूछे जाने पर उन्होंने खामोशी साध ली. बगल में केशुरा मोड़ से सरौनी तक जर्जर पथ पर किसी का ध्यान नहीं है. इस पथ पर इतने गड्ढे हैं कि ग्रामीणों का चलना मुश्किल है. इसे भी पढ़ें :चक्रधरपुर">https://lagatar.in/chakradharpur-22-candidates-in-the-fray-for-anjuman-islamia-withdrawal-of-nominations-on-24-2/">चक्रधरपुर: क्रांतिकारी आदिवासी महासभा ने निकाली रैली, एसडीओ को सौंपा पत्र
Leave a Comment