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हजारीबाग : संगम ने मनाया नववर्ष, भाईचारगी की डोर मजबूत करने का दिया संदेश

 
Hazaribagh : सागर भक्ति संगम के कलाकारों ने स्थानीय स्वर्ण जयंती पार्क में जनसेवा और संकल्प के साथ नववर्ष मनाया. इस मौके पर संगम के सदस्यों ने एक-दूसरे को पुष्प गुच्छ देकर नववर्ष की बधाई दी. साथ ही भाईचारगी की डोर मजबूत करने का संदेश दिया. सदस्यों ने विश्व शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की. सदस्यों ने आजीवन जनसेवा एवं समाज में व्याप्त कुरीतियों को जड़ से उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया. सभा की शुरूआत कवि गोपी कृष्ण सहाय पांडेय की नव वर्ष पर लिखित कविता के पाठ से हुआ. इसे भी पढ़ें– धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-25-thousand-people-celebrated-new-year-at-munidihs-bhatinda-fall/">धनबाद

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समाज से भेदभाव मिटाने की जरूरत- विजय केसरी

इस मौके पर संगम के संयोजक विजय केसरी ने कहा कि आज की बदली परिस्थिति में लोगों को भेदभाव मिटाकर भाईचारे की गांठ को मजबूत करने की जरूरत है. हर नव वर्ष का पहला दिन एक संकल्प लेने के लिए लोगों के समक्ष उपस्थित होता है. आपका दृढ़ संकल्प ही आपको महान बनाता है. वहीं योगेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि नव वर्ष मिलने और मिलाने का दिन है. समाज के लोगों को चाहिए कि आपसी मतभेद मिटाकर दोस्ती की नई शुरुआत करें. सच्चे अर्थों में नववर्ष यही है.

नववर्ष आनंद देने और लेने का दिन- सीता देवी

जबकि समाजसेविका सीता देवी ने कहा कि भजन के गायन से स्वयं का चित आनंद से भर जाता है. सुनने वाले भी आनंदित हो जाते हैं. नववर्ष आनंद देने और आनंद लेने का दिन है. वहीं केबी वीमेंस कॉलेज के पूर्व प्राचार्य विनय प्रसाद ने कहा कि आज माता-पिता को वृद्धाश्रम में क्यों रहना पड़ रहा है. नववर्ष पर हम सबों को अपने रिश्ते में सुधार लाने के लिए संकल्प लेने की जरूरत है. पूर्व शिक्षिका उषा सहाय ने कहा कि नववर्ष के नाम पर जिन चीजों को परोसा जा रहा है, यह अच्छी परंपरा की शुरुआत नहीं है. इसे भी पढ़ें– बहरागोड़ा">https://lagatar.in/bahragora-maitri-sangathan-gave-the-message-of-cleanliness-in-merughati/">बहरागोड़ा

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जीवन ईमानदारी पूर्वक जियें- शंभू शरण सिंह

वहीं पूर्व कार्यपालक अभियंता शंभू शरण सिंह ने कहा कि जीवन को ईमानदारी पूर्वक जियें. नववर्ष के पहले दीन ईमानदारी और कर्तव्यपराण्यता का संकल्प लेने की जरूरत है. जबकि कवि गोपी कृष्ण सहाय पांडेय ने कहा कि ईश्वर की दी हुई इस ऊर्जा का खर्च ईमानदारी, जन सहयोग और दूसरे की भलाई में खर्च करते, तो विश्व स्वर्ग बन जाता. [wpse_comments_template]
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