जांच के दौरान सर्वे में 31 लोगों की अपनी जमीन होने का दावा मिला गलत रैयती बता कर बेच दिए गए अधिकांश गैर मजरूआ प्लॉट प्रशासन के चले बुलडोजर के बाद गरमाया मामला Hazaribagh : हजारीबाग शहर से सटे कई इलाके जिनमें सिरसी, पंचशील, खपरियावां और बाईपास से लगे हरणगंज के कुछ भूखंड गलत तरीके से बेचे जाने के कारण बदनाम है. इस इलाके में दबंग लोग ही जमीन लेने की सोचते हैं, क्योंकि अधिकांश प्लॉट जो गैर मजरूआ थे, उन्हें रैयती बताकर बेच दिया गया. दो दिन पहले प्रशासन के चले बुलडोजर के बाद मामला फिर गरमा गया है. सिरसी मौजा की जमीन पर जिसका कुल रकवा-100 एकड़ से अधिक है, सरकार के बही खातों में जंगल, झाड़ और गैरमजरूआ खास अंकित है. ऐसी प्रकृति की भूमि की खरीद-बिक्री प्रतिबंधित है. सरकार ने ऐसी भूमि की जिलावार एक सूची भी बनाई है, जिसे ऑनलाइन भी देखा जा सकता है. इस क्षेत्र में कई लोगों के पास तत्कालीन जमींदार की ओर से निर्गत हुकमनामा, रजिस्ट्री-बिक्री और बंदोबस्त के कागजात हैं. इसी तरह के कागजातधारी रैयतों में एक कमला देवी ने तत्कालीन कमिश्नर नितिन मदन कुलकर्णी के यहां पुनर्निरीक्षण याचिका दी थी, जिसे खारिज करते हुए स्पष्ट आदेश हुआ था कि कमला देवी की प्रश्नगत जमीन जिसका खाता नंबर 251, प्लॉट नंबर 882 है, वह जमीन सरकारी है और इनकी जमाबंदी ही संदेहास्पद है. इस मामले में आयुक्त ने तत्कालीन उपायुक्त से तत्काल कार्रवाई करने का भी आदेश दिया था, जो ठंडे बस्ते में चला गया. बाद में सिरसी के इसी इलाके में अतिक्रमण कर रह रहे करीब 31 लोगों का सर्वे हुआ, जो अपनी जमीन होने का दावा करते थे. लेकिन जांच के बाद दावा गलत पाया गया, जिसमें बताया गया कि कमला देवी समेत अन्य 31 लोगों की जमाबंदी मैन्युअल पंजी में दर्ज नहीं है. लेकिन ऑनलाइन है, जो गलत है. इसकी पूरी सूची अपर समाहर्ता को सौंपी गई. तत्कालीन सीओ के इस पत्र के आलोक में अब तक अपर समाहर्ता ने कोई कार्रवाई नहीं की है. सवाल यह उठ रहा है जब कमिश्नर ने इस पूरे भूखंड को सरकारी बताया और उपायुक्त को पूरे मामले पर कार्रवाई का आदेश दिया था, तब भी कई लोगों के नाम ऑनलाइन कैसे चढ़ गए और जमीन की मालगुजारी रसीद भी कैसे कटे. इस मामले में संबंधित अंचलाधिकारी, अंचल निरीक्षक और कर्मचारी पर कब कार्रवाई होगी. इसे भी पढ़ें : पदमा">https://lagatar.in/two-separate-firs-in-padma-police-public-clash-15-accused-arrested/">पदमा
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हजारीबाग : सिरसी के खाता नंबर 251 को तत्कालीन कमिश्नर ने बताया था सरकारी, खारिज कर दी थी पुनर्निरीक्षण याचिका
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