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हजारीबाग : कभी मांगी जाती है लेवी, कभी कमीशनखोरी, ऊपर से मिलती है धमकी

 
योजनाओं पर काम करना संवेदकों के लिए बना सिरदर्द ठेकेदारी से उबने लगा है ठेकेदारों का मन, बताते हैं कई तरह की पीड़ा Pramod Upadhyay Hazaribagh : हजारीबाग में योजनाओं पर काम करना ठेकेदारों के लिए सिरदर्द बन गया है. कई ठेकेदारों का कहना है कि अब ठेकेदारी का काम छोड़ना चाहते हैं. शांति से काम होने नहीं दिया जाता और कोई लाभ भी नहीं हो पा रहा है. दिन-रात लगकर काम कराते हैं. लेकिन कभी लेवी मांगी जाती है, तो कभी रंगदारी, तो कभी कमीशनखोरी. ऊपर से आए दिन धमकियां भी मिलती रहती हैं. ऐसे में ठेकेदारी से मन उबने लगा है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/06/dddd-31.jpg"

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मैनेज करने में देनी पड़ती है मोटी रकम

हजारीबाग संवेदक संघ के सचिव मुकेश कुमार कहते हैं कि एक करोड़ की योजना में दो लाख रुपए का एफडी बतौर सिक्योरिटी जमा करना पड़ता है. टेंडर के वक्त 10 हजार रुपए का ड्राफ्ट देना पड़ता है. वहीं 2500 रुपए का एफडीपीटी, फिर टेंडर डालने वाले को 2500 रुपए देना पड़ता है. दूसरे संवेदकों को अलग से मैनेज करना पड़ता है. उसमें भी खासी रकम देनी पड़ती है. इसे भी पढ़ें :धनबाद:">https://lagatar.in/dhanbad-on-the-instructions-of-the-governor-three-women-got-sewing-machine/">धनबाद:

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काम पूरा करने में आठ से 12 माह तक की मिलती है मोहलत

इस संबंध में संवेदक संघ के अध्यक्ष दीपक कुमार ने बताया कि इन दिनों ठेकेदार काफी परेशान हैं. एक तो काम पूरा करने के लिए विभाग से आठ से 12 माह की मोहलत मिलती है. इसमें तीन माह ऑफिस से लेकर जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटते बीत जाते हैं. कागजी प्रक्रिया से लेकर शिलान्यास तक में काफी वक्त गुजर जाते हैं. समय पर काम पूरा नहीं होने पर 10% पारिश्रमिक काट ली जाती है. ऐसे ही कई ठेकेदारों ने अपनी व्यथा बताई और काम छोड़ देने का मन करने की बात कही. इसे भी पढ़ें :स्ट्राइक">https://lagatar.in/death-of-28-patients-in-rims-during-strike-retired-judge-sajjan-dubey-will-investigate/">स्ट्राइक

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ठेकेदारों से साथ हुई घटना

केस-1 : पिछले साल अटका में ठेकदार छोटेलाल को लेवी नहीं देने पर गोली मारकर घायल कर दिया गया था. केस-2 : बड़कागांव से मटरी टांड़ में सड़क निर्माण के दौरान ठेकदार विजय साव को भी गोली मारकर घायल कर दिया गया था. केस-3 : इसी वर्ष मांडू से बलसागरा तक कामधेनु कंपनी का सड़क निर्माण का कार्य चल रहा था. लेवी नहीं देने पर कंपनी की काम एक गैंगस्टर की ओर से बंद करवा दिया गया था. बाद में काफी मुश्किल से काम शुरू हो पाया. केस-4 : मनातू से सिसई गोबदा तक अष्टभुजी कंपनी का काम सड़क निर्माण का काम चल रहा था. लेवी नहीं देने पर काम रोक दिया गया था. बाद में पुलिस के सहयोग से काम शुरू हो पाया. केस-5 : छह जनवरी को बड़कागांव में संजय कुमार कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा था. इस दौरान लेवी की रकम नहीं देने पर 25 दिसंबर को अपराधियों ने फायरिंग की थी. दहशत के कारण कुछ दिनों तक काम बंद रहा था. [wpse_comments_template]
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