योजनाओं पर काम करना संवेदकों के लिए बना सिरदर्द ठेकेदारी से उबने लगा है ठेकेदारों का मन, बताते हैं कई तरह की पीड़ा Pramod Upadhyay Hazaribagh : हजारीबाग में योजनाओं पर काम करना ठेकेदारों के लिए सिरदर्द बन गया है. कई ठेकेदारों का कहना है कि अब ठेकेदारी का काम छोड़ना चाहते हैं. शांति से काम होने नहीं दिया जाता और कोई लाभ भी नहीं हो पा रहा है. दिन-रात लगकर काम कराते हैं. लेकिन कभी लेवी मांगी जाती है, तो कभी रंगदारी, तो कभी कमीशनखोरी. ऊपर से आए दिन धमकियां भी मिलती रहती हैं. ऐसे में ठेकेदारी से मन उबने लगा है.
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मैनेज करने में देनी पड़ती है मोटी रकम
हजारीबाग संवेदक संघ के सचिव मुकेश कुमार कहते हैं कि एक करोड़ की योजना में दो लाख रुपए का एफडी बतौर सिक्योरिटी जमा करना पड़ता है. टेंडर के वक्त 10 हजार रुपए का ड्राफ्ट देना पड़ता है. वहीं 2500 रुपए का एफडीपीटी, फिर टेंडर डालने वाले को 2500 रुपए देना पड़ता है. दूसरे संवेदकों को अलग से मैनेज करना पड़ता है. उसमें भी खासी रकम देनी पड़ती है. इसे भी पढ़ें :धनबाद:">https://lagatar.in/dhanbad-on-the-instructions-of-the-governor-three-women-got-sewing-machine/">धनबाद:राज्यपाल के निर्देश पर तीन महिलाओं को मिली सिलाई मशीन
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काम पूरा करने में आठ से 12 माह तक की मिलती है मोहलत
इस संबंध में संवेदक संघ के अध्यक्ष दीपक कुमार ने बताया कि इन दिनों ठेकेदार काफी परेशान हैं. एक तो काम पूरा करने के लिए विभाग से आठ से 12 माह की मोहलत मिलती है. इसमें तीन माह ऑफिस से लेकर जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटते बीत जाते हैं. कागजी प्रक्रिया से लेकर शिलान्यास तक में काफी वक्त गुजर जाते हैं. समय पर काम पूरा नहीं होने पर 10% पारिश्रमिक काट ली जाती है. ऐसे ही कई ठेकेदारों ने अपनी व्यथा बताई और काम छोड़ देने का मन करने की बात कही. इसे भी पढ़ें :स्ट्राइक">https://lagatar.in/death-of-28-patients-in-rims-during-strike-retired-judge-sajjan-dubey-will-investigate/">स्ट्राइकके दौरान रिम्स में 28 मरीजों की मौत मामलाः रिटायर्ड जज सज्जन दुबे करेंगे जांच
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