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हजारीबाग: अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे आत्माकर्मी, मानदेय भुगतान की मांग

Hazaribagh: झारखंड आत्मा संघ के आह्वान पर राज्य भर के आत्माकर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. सभी कर्मी अपने-अपने जिला मुख्यालय के कार्यालय पर धरना पर बैठ गए हैं. इससे कृषि योजनाओं से संबंधित कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं. आत्मा हजारीबाग से जुड़े प्रखंड में कार्यरत सभी कर्मी भी आत्मा हजारीबाग कार्यालय में पिछले तीन दिनों से धरने पर बैठे हैं. धरने पर बैठने से पहले झारखंड आत्मा संघ की ओर से राज्य सरकार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर पत्र भी सौंप चुके हैं. पत्र के अनुसार सितंबर को राज्य भर के कर्मियों ने तीन सितंबर को काला बिल्ला लगा कर प्रदर्शन किया था. आंदोलन के दूसरे चरण में सात सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल के तहत अब आत्मा कार्यालय पर प्रदर्शन कर रहे हैं.

योजनाओं के संचालन में बढ़ी परेशानी

आत्मा कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने के बाद केंद्र व राज्य सरकार की ओर से किसानों के कल्याण के लिए चलाई जाने वाली दर्जनों योजनाओं के संचालन में परेशानी बढ़ गई है. वर्तमान में प्रधानमंत्री कृषि सम्मान निधि योजना के लाभुक का ई-केवाईसी का कार्य चल रहा है. समय पर लाभुकों का ई-केवाईसी नहीं होगा, तो वे योजना के लाभ से वंचित हो सकते हैं. इतना ही नहीं वर्षा की अनियमितता के कारण हजारीबाग जिले के अधिकांश प्रखंड में धान की खेती नहीं हो पायी है. लिहाजा राज्य सरकार की ओर से जारी सुखाड़ राहत योजना के तहत प्रभावित किसानों का रजिस्ट्रेशन भी होना है. अगर हड़ताल लंबी खिंची, तो कृषि और उसके सहायक विभाग की ओर से चलने वाली दर्जनों योजनाओं के संचालन में परेशानी तय है.

आत्माकर्मियों का समायोजन करने की मांग

राज्य भर के आत्माकर्मियों का कहना है कि वे पिछले 10 वर्षों से आत्मा अंतर्गत कृषि विभाग की योजनाओं को गति दे रहे हैं. उनकी मांग है कि योग्यता के अनुरूप कृषि विभाग के अंतर्गत रिक्त पड़े पदों पर आत्माकर्मियों का समायोजन किया जाए. समायोजन की मांग कर रहे आत्माकर्मियों को पिछले छह माह से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है. बावजूद इसके उनकी ओर से पिछले छह माह से कृषि योजनाओं को धरातल पर उतारा जा रहा है. ऐसे में उनकी मांग है कि मानदेय का भुगतान समय पर किया जाए. धरने पर बैठे आत्माकर्मी सुभाष कुमार, अनिकेत टुड़वार, उमेश कुमार, पुष्पा कुमारी, राजेश कुमार, संजय कुमार, नकुल कुमार और बिलाश कुमार ने बताया कि उनलोगों को समय पर मानदेय नहीं मिलने से आर्थिक तंगी है. हालात यह है कि अब घर चलाना भी मुश्किल हो गया है. कृषि योजना को धरातल रूप देने के लिए उन्हें प्रखंडों के विभिन्न हिस्सों में भ्रमण करना पड़ता है. यदि इस दौरान कोई हादसा हो जाता है तो विभाग की ओर से सहयोग का कोई प्रावधान नहीं है, जो चिंतनीय है. अब तक सरकार या विभाग की ओर से इस पर कोई विचार नहीं किया जाता है, यह बहुत दुर्भाग्य की बात है. इसे भी पढ़ें– ममता">https://lagatar.in/mamta-banerjee-said-i-nitish-kumar-hemant-soren-will-come-together-in-2024-to-defeat-bjp/">ममता

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