अब नगर निगम के निर्णय के सामने खामोश हैं विरोध करने वाले लोग Pramod Upadhyay Hazaribagh : हजारीबाग शहर में चुंगी के कारण शहर के बाजार प्रभावित हो रहे हैं. यहां न तो सब्जी विक्रेता पहुंच रहे हैं और न व्यापारी कारोबार करने के लिए आ रहे हैं. लेकिन दुकानदारों की परेशानी दूर नहीं हो रही है. उन्हें माल की खरीदारी करने के लिए शहर आना पड़ रहा है. गांव के लोग अपने ही क्षेत्र में व्यापारी को ढूंढ़ उससे सामान खरीद रहे हैं. नगर निगम की ओर से 23 दिसंबर 2022 को चुंगी वसूली लागू की गई. छह माह से छोटे व्यापारी इस वसूली से परेशान हैं. नगर निगम में 10 जगहों पर चुंगी वसूली के लिए केंद्र खोले गए हैं. यह टेंडर पीएल सरोज के नाम जारी हुआ था. उस वक्त से लेकर अब तक शहर के हर कोने पर बसों और मालवाहक वाहनों से चुंगी वसूली की जा रही है. वाहनों के अनुसार 50 रुपए से 200 रुपए हर ट्रिप में लिए जाते हैं. नगर निगम के इस निर्णय का उस वक्त खूब विरोध हुआ, लेकिन अब सभी लोगों ने इस मुद्दे पर एक तरह से चुप्पी साध ली है. कारोबारियों का कहना है कि उनका साथ देनेवाला कोई नहीं है.
आम जनता को भी हो रही परेशानी
चुंगी देने से बचने के लिए अब बसें शहर में प्रवेश नहीं कर सीधा बाइपास होकर निकल जाती है. यात्रियों को सिंदूर, भारत माता चौक, अमृतनगर चौक आदि में ही उतार दिया जाता है. ऐसे में यात्रियों को वहां से अतिरिक्त भाड़ा देकर ऑटो से शहर आना पड़ता है.गांव में ही घूम-घूम कर बेचते हैं सब्जियां
केस-1 : कटकमसांडी के खिरोधर महतो कहते हैं कि बाजार में कई जगह टैक्स देना पड़ता है. ऐसे में गांव में ही घूम-घूम कर सब्जियां बेच लेते हैं. पहले शहर में जाकर कुछ ज्यादा कमा लेते थे. लेकिन गांव में वह स्थिति नहीं है. ज्यादा मोल-तोल होता है.आए थे पैसे बचाने, जगह-जगह देना पड़ा टैक्स
केस-2 : शादी का सामान खरीद रहे अभिषेक पासवान ने बताया कि बाजार के अंदर से सामान बाहर लाने पर भी टैक्स देना पड़ता है. वाहन लगाने में पार्किंग का अलग टैक्स देना पड़ा. पिकअप लेकर एक साथ सभी सामान लेकर जाने और पैसे बचाने का ख्वाब अधूरा रह गया. इटखोरी से आने पर नगवां टोल पर 100 रुपए चार्ज देना पड़ा. फिर शहर के अंदर 50 रुपए चुंगी देना पड़ा. सब्जी मार्केट में प्रति बोरा और पार्किंग के भी पैसे देने पड़े. इससे तो बेहतर था गांव में खरीदारी कर लेते. वापस जाने में रूट बदला, तो भी चुंगी देनी पड़ी.
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