दृष्टिहीन के जीवन में देवदूत बनकर आए अमित, कश्यप मेमोरियल के डॉ. विभूति कश्यप ने किया सफल ऑपरेशन
Pramod Upadhyay Hazaribagh : गरीब परिवार में जन्मे त्रिलोकी के जीवन में अंधेरा ही अंधेरा था. वह जन्म से ही अंधा था. उसने सोचा भी नहीं था कि वह कभी इस दुनिया की खूबसूरती को देख पाएगा. त्रिलोकी ने अपने जीवन के 27 अहम साल अंधेरे में गुजार दिए. मगर उनके जीवन में एक शख्स देवदूत बनकर आया, जो उसके अंधेरे जीवन में उजाले की खुशियां भर गया. उस शख्स का नाम है अमित कुमार. त्रिलोकी कोडरमा जिले के झुमरी तिलैया स्थित तिलैया बस्ती निवासी स्व. टुकलाल तुरी का बेटा है. परिवार की आर्थिक स्थिति दयनीय है. इस वजह से उसके आंखों का ऑपरेशन कराने के बारे में परिवार में कोई सोच भी नहीं सकता था. इस बीच वर्ष 2019 में कोडरमा के ताराटांड़ के रहनेवाले अमित कुमार को त्रिलोकी के बारे में पता चला. अमित ने ठानी की वह त्रिलोकी की आंखों की रौशनी लौटा कर रहेंगे. वहत त्रिलोकी के आंखों की रौशनी लौटाने के अभियान में जुट गए. इस दौरान अमित ने कई लोगों से संपर्क किया. रांची की नंदिता गुप्ता से मिला. कई डॉक्टरों से संपर्क किया और त्रिलोकी की समस्या बताई. अंतत:, अमित त्रिलोकी को लेकर कश्यप आई मेमोरियल हॉस्पीटल रांची पहुंचे. यहां डॉ. विभूति कश्यप से मिलकर सारी बात बतायी. डॉ. कश्यप ने भी त्रिलोकी के केस को एक चैलेंज के रूप में लिया और अपनी टीम की मदद से एक सफल ऑपरेशन कर त्रिलोकी के एक आंख की राैशनी लौटा दी. आंख की रौशनी लौटने से त्रिलोकी की खुशी का ठिकाना नहीं है. उसे विश्वास ही नहीं हो रहा है कि यह दुनिया इतनी खूबसूरत है.अब बोझ नहीं, मजलूमों का बनूंगा सहारा : त्रिलोकी
एक आंख की रौशनी लौटने के बाद त्रिलोकी बहुत खुश है. वह कहता है कि पिछले 27 सालों की कोशिश, मानसिक कल्पना अब साकार हो गया. वह अब दिव्यांग नहीं रहा. वह भी सामान्य लोगों की तरह पूरी दुनिया देख सकता है. उसने कहा कि अब वह पढ़ेगा और मेहनत कर आगे बढ़ेगा. दूसरों पर बोझ नहीं बल्कि मजलूमों का सहारा बनेगा. त्रिलोकी कहता है अपनी विधवा मां और परिवार का सहारा बन मुख्य धारा से जुड़कर एक सम्मान की जीवन जीएगा. त्रिलोकी ने अमित कुमार और डॉ. विभूति कश्यप को दिल से धन्यवाद दिया है. वह कहता है अमित और डॉ. विभूति उसके जीवन में देवदूत बनकर आए.अमित ने त्रिलोकी के लिए क्या-क्या किया
अमित ने सबसे पहले त्रिलोकी का आधार कार्ड बनवाया. इसके बाद लाल राशन कार्ड में उसका नाम दर्ज करवाया. बैंक में खाता भी खुलवाने के साथ नि:शुल्क इलाज के लिए स्मार्ट कार्ड बनवाया. इतना ही नहीं पूरे लॉकडाउन काल में सामाजिक संस्थाओं की ओर से बंटनेवाले राशन और अन्य जरूरत के सामान उपलब्ध कराए. रांची की नंदिता गुप्ता ने अमित की इस पहले को सराहा और उनकी मदद की. सबकी मदद से अमित त्रिलोकी की आंखों की राैशनी लौटाने में सफल रहा. अमित का कहना है कि ऐसे परिवारों की मदद करने से उसे काफी सुकून मिलता है. त्रिलोकी की सगी बहन गुड़िया भी दोनों आंखों से दृष्टिहीन है. अमित कहता है कि गुड़िया के आंखों की रौशनी लौटाने के लिए वह अब संकल्पित है. इसके लिए वह जहां भी जाना होगा, जिससे भी मदद लेनी होगी लेगा. इसे भी पढ़ें : गांडेय">https://lagatar.in/nishikant-bursts-new-years-bomb-on-the-resignation-of-jharkhands-gandey-mla/">गांडेयसे JMM विधायक के इस्तीफा पर निशिकांत ने फोड़ा नये साल का बम [wpse_comments_tempate]
Leave a Comment