Pramod Upadhyay Hazaribagh: जब पदाधिकारिओं और जनप्रतिनिधियों ने साथ छोड़ दिया, तो आवागमन में वर्षों से परेशानी झेल रहे बड़गांव के ग्रामीणों ने खुद सड़क बनाने का फैसला किया. वे एकजुट हुए और सड़क निर्माण में लग गये. ग्रामीण हाथों में कुदाल-फावड़ा लेकर आए. कोई ट्रैक्टर से मिट्टी लाने लगा, तो कोई बाल्टी से सड़क पर जमे पानी को फेंकने लगा. इस तरह से श्रमदान शुरू हो गया. यह नजारा रविवार को बड़गांव में देखने को मिला. ग्रामीण शंकर साहू, शशि कुमार पासवान और गणेश कुमार समेत कई ग्रामीण सड़क निर्माण के लिए श्रमदान के लिए उतरे. इनमें चोपे पंसस अखिलेश उपाध्याय, बैंककर्मी मुकेश कुमार और शिक्षक संजय प्रसाद भी श्रमदान किये. ग्रामीण सरकारी व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों व प्रशासन से क्षुब्ध थे. उनका कहना था कि चार किलोमीटर सड़क निर्माण का उनलोगों ने संकल्प ले रखा है. अब किसी का साथ नहीं चाहिए. वे लोग मिलकर सड़क बना खुद आवागमन बहाल कर लेंगे. यह इलाका हजारीबाग और चतरा का सीमावर्ती क्षेत्र है. हजारीबाग जिले की सीमा से महज 15 किलोमीटर और चतरा जिले से 40 किलोमीटर पहले स्थित बड़गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. बड़गांव हजारीबाग जिले के कटकमदाग और कटकमसांडी प्रखंड से सटा है. ग्रामीण शंकर साहू कहते हैं कि बड़गांव उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र है. विकास की किरणों से मीलों दूर है. सिमरिया से बड़गांव तक रोड बनाया गया है. शशि कुमार पासवान ने पीड़ा सुनाई कि गलत बंटवारे के फेर में हम ग्रामीण पीस रहे हैं. हजारीबाग शहर नजदीक होने के बावजूद सभी काम चतरा जिले से करवाना पड़ता है. चूंकि बड़गांव चतरा जिले में चला गया है. हजारीबाग से यह महज 15 किलोमीटर दूर है, जबकि चतरा 40 किलोमीटर और प्रखंड मुख्यालय सिमरिया 25 किलोमीटर. इस दूरी की वजह से काम पर असर पड़ता है. बता दें कि चतरा जिले के विरहू से बड़गांव तक सड़क बना दी गई है. लेकिन बड़गांव से हजारीबाग जिले में पड़नेवाले कटकमसांडी रोड जाने के लिए मात्र चार किलोमीटर सड़क नहीं बनाई गई. इस चार किलोमीटर की दूरी तय करने में लोगों के पसीने छूट जाते हैं. ग्रामीण गणेश कुमार, मुकेश कुमार और संजय प्रसाद कहते हैं कि डीसी, विधायक और सांसद से लेकर मंत्री तक को आवेदन दिया गया, लेकिन किसी ने सड़क नहीं बनवाई. 20 साल पहले इसी रोड पर मिट्टी-मोरम का काम हुआ था. इसके बाद से आज तक कोई झांकने तक नहीं आया. सरकार दावा करती रही कि हर गांव को सड़क सुविधा देते हुए उसे शहर से जोड़ा गया. लेकिन बड़गांव को आज तक हजारीबाग सड़क से नहीं जोड़ा गया. इसे भी पढ़ें- उपराष्ट्रपति">https://lagatar.in/many-leaders-including-pm-modi-congratulated-jagdeep-dhankhar-on-being-elected-vice-president/">उपराष्ट्रपति
चुने जाने पर जगदीप धनखड़ को पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने दी बधाई इसी मुख्य सड़क से नवादा रेलवे पुल से महाने नदी तक सड़क खराब है. जिसमें बड़गांव भी है. गांव की इस सड़क से प्रतिदिन करीब 8 हजार आबादी हजारीबाग शहर के लिए आवागमन करती है. यहां के लोग कटकमसांडी के कंचनपुर, लुपुंग, नवादा, जलमा और कंडसार से खरीद-बिक्री के लिए आते-जाते हैं. सड़क खराब रहने से लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है. इस कारण उनका व्यापार भी प्रभावित हो गया है. इस संबंध में पंसस ने कहा कि खराब सड़क के बारे में कंडसार के मुखिया को भी जानकारी दी गई है. वे तीन टर्म से इस क्षेत्र के मुखिया रहे हैं. उन्हीं के क्षेत्र में बड़गांव खराब पथ का इलाका आता है. इसे भी पढ़ें- बॉक्स">https://lagatar.in/the-magic-of-hindi-cinema-is-not-working-at-the-box-office-souths-films-have-won/">बॉक्स
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हजारीबाग: बड़गांव में श्रमदान कर सड़क बनाने में जुटे ग्रामीण

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