जान जोखिम में डाल कर नदी पार कर बरकट्ठा पहुंचते हैं लोग सड़क के अभाव में नहीं पहुंच पाती है एंबुलेंस नए साल में बुनियादी सुविधाएं बहाल होने की आस Suresh Pandey Barkattha : हजारीबाग के बरकट्ठा प्रखंड क्षेत्र स्थित कोनहारा खुर्द के डुमरियाटांड़ में आजादी के सात दशक बीतने के बाद भी विकास की किरणें नहीं पहुंच पायी हैं. इस गांव की आबादी 500 के आसपास है और पूरा क्षेत्र पहाड़ी और जंगलों से घिरा हुआ है. अब ग्रामीणों की निगाहें नववर्ष 2023 पर टिकी हुई हैं. वे आस लगाकर बैठे हैं कि नया साल उनके लिए नया सवेरा लेकर आएगा. उन्हें भी बुनियादी सुविधाएं मिल पाएंगी. यहां के ग्रामीण जान जोखिम में डाल कर नदी पार कर प्रखंड मुख्यालय आते-जाते हैं. इस क्षेत्र में एक आंगनबाड़ी और उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय है. स्कूल में करीब 60 आदिवासी बच्चे पढ़ाई करते हैं. यहां के शिक्षकों को बरसात में आने-जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इसे भी पढ़ें–
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भारत जकात मांझी परगना महल के अध्यक्ष रामजी बेसरा और सचिव मनोज मुर्मू ने बताया कि गांव में किसी भी व्यक्ति के बीमार पड़ने पर काफी परेशानी होती है. सड़क नहीं रहने के कारण एंबुलेंस भी नहीं पहुंच पाती है. ग्रामीणों ने झारखंड सरकार से यहां पुल निर्माण की मांग की है. रीतलाल मांझी, सोमर मांझी, बंशी मांझी, मोहन मांझी, मणिलाल मांझी, पांडो मांझी, मुन्ना सोरेन, जगदीश सोरेन, छोटका सोरेन, दिनेश सोरेन, टोलो देवी, बड़की देवी ,छोटकी देवी, अंजली देवी, देवकी देवी, रीता देवी, सरिता देवी, चंदमुनी देवी, कैली देवी समेत कई ग्रामीणों का कहना है कि सरकार अब रहम करे और उनकी बुनियादी सुविधाओं को बहाल करे. इसे भी पढ़ें–
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