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दान के पैसे से चल रहा हजारीबाग का ओल्ड एज होम, कर्मियों को 3 साल से नहीं मिला वेतन

Gaurav Prakash Hazaribagh : हजारीबाग ओल्ड एज होम दान के पैसे से चल रहा है. वर्ष 2018 से अब तक कल्याण विभाग की ओर से किसी भी तरह का भुगतान हजारीबाग ओल्ड एज होम को नहीं किया गया. ओल्ड एज होम रेडक्रॉस सोसाइटी के अधीन संचालित है. इसके पदेन अध्यक्ष सदर एसडीओ हैं. एसडीओ विद्याभूषण ने विभाग से वार्ता कर दबाव बनाया तो 2021 और 22 का भुगतान किया गया. लेकिन अब तक लाखों रुपए समाज कल्याण विभाग पर बकाया है. प्रतिवर्ष आठ से नौ लाख रुपए ओल्ड एज होम चलाने में खर्च होता है. 30 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन के रूप में खर्च होता है. वहीं अब तक लगभग छह लाख रुपए बिजली बिल भी बकाया हो चुका है. ऐसे में ओल्ड एज होम की स्थिति बेहद खराब है. हजारीबाग के दान वीरों के जरिए तीन वक्त का खाना, नाश्ता समेत अन्य सुविधाएं वृद्ध आश्रम में रहने वाले 26 बुजुर्गों को मुहैया कराया जा रहा है. कोई यहां जन्मदिन मनाता है, तो कोई शादी की सालगिरह. नाम नहीं छापने की शर्त पर एक समाजसेवी ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे की शादी के उपलक्ष्य में एक साल का राशन देने का वादा किया है. वहीं एक दानवीर ने फ्रिज लाकर दे दिया, ताकि रहने वाले लोगों को परेशानी नहीं हो. (हजारीबाग">https://lagatar.in/category/jharkhand/north-chotanagpur-division/hazaribagh/">(हजारीबाग

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कर्ज के बोझ से दबे जा रहे : दीपक कुमार

[caption id="attachment_642226" align="alignleft" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/05/deepak-kr_231-150x150.jpg"

alt="दीपक कुमार" width="150" height="150" /> दीपक कुमार[/caption] ओल्ड एज होम में काम करने वाले दीपक कुमार बताते हैं कि तीन साल से वेतन बकाया है. किसी तरह घर चल रहा है. घर चलाने में बहन मदद करती है. वे लोग कर्ज में दबे जा रहे हैं. एक बेटा और तीन बेटियां है. सभी की पढ़ाई-लिखाई प्रभावित हो गई है. बेटी 35 साल की हो गई है और अब तक उसके हाथ भी पीले नहीं कर पाए हैं.

दूसरी जगह काम कर चला रहे घर : नसीमा खातून

[caption id="attachment_642227" align="alignleft" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/05/naseema-khatoon_51-150x150.jpg"

alt="नसीमा खातून" width="150" height="150" /> नसीमा खातून[/caption] वृद्ध आश्रम में कपड़ा धोने वाली नसीमा खातून का कहना है कि दूसरी जगह काम कर घर चला रही हैं. उनको तीन साल से वेतन नहीं मिला है. चार बेटियां हैं और एक की शादी हुई है. ऐसे में तीन बेटियों की शादी कैसे होगी, यह भी उसके लिए मुसीबत से कम नहीं है. बड़ी ही मुश्किल से घर चलता है.

मलाल है कि कर्मियों को वेतन नहीं दे पा रहे : सनत कुमार 

[caption id="attachment_642229" align="alignleft" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/05/sanat-kr-sinha_411-150x150.jpg"

alt="सनत कुमार " width="150" height="150" /> सनत कुमार[/caption] रेडक्रॉस के सदस्य सनत कुमार सिन्हा बताते हैं कि ओल्ड एज होम में भले ही सरकार की ओर से पैसे का भुगतान नहीं किया गया है, लेकिन हजारीबाग के लोगों का उत्साह और सहयोग है कि राशन की समस्या नहीं होती है. तीनों वक्त खाना के अलावा नाश्ता भी उपलब्ध कराया जाता है. समय-समय पर वृद्धों का इलाज भी होता है. इस बात का बेहद मलाल है कि कर्मियों को वेतन नहीं दे पा रहे हैं.

सरकार की ओर से भुगतान होना चाहिए था : तनवीर सिंह

[caption id="attachment_642230" align="alignleft" width="150"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/05/tanveer-singh-1_605-150x150.jpg"

alt="तनवीर सिंह" width="150" height="150" /> तनवीर सिंह[/caption] रेडक्रॉस सोसाइटी के सचिव तनवीर सिंह भी कहते हैं कि सरकार की ओर से जो भुगतान होना चाहिए था, वह 2018 से नहीं हुआ. हजारीबाग एसडीओ विद्याभूषण की पहल पर एक साल का पैसा दिया गया. लेकिन यह चुनौती है कि कैसे वेतन दिया जाए. हजारीबाग में समाजसेवियों और आम जनता की मदद से ओल्ड एज होम में खाने की कमी नहीं हो रही है. इसके लिए वे लोग हजारीबाग वासियों को धन्यवाद देते हैं. [wpse_comments_template]

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