Search

 
 
 

Court News: वन विभाग में सभी तरह के भुगतान पर HC की रोक हटी

वन विभाग में सभी तरह के भुगतान पर लगाई पाबंदी हटा ली गई है. अब वन विभाग में वेतन सहित सभी मद के पैसे की निकासी हो सकेगी.
 
कोर्ट-कचहरी की खबरें

Ranchi: वन विभाग में सभी तरह के भुगतान पर लगाई पाबंदी हटा ली गई है. अब वन विभाग में वेतन सहित सभी मद के पैसे की निकासी हो सकेगी.

इसे भी पढ़ें: 

हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने झारखंड सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए वन विभाग में प्लान एवं नन प्लान सहित अन्य भुगतान पर हाई कोर्ट की एकल पीठ द्वारा 10 जून को लगाई गई पाबंदी पर रोक लगा दी है. मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी.

 

मामले में राज्य सरकार की ओर से हाई कोर्ट की एकल पीठ के आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी गई थी. हालांकि पिछले दिनों हुई सुनवाई में हाई कोर्ट की एकल पीठ ने राज्य सरकार के आग्रह को देखते हुए  वन विभाग में प्लान मद की राशि भुगतान पर से रोक हटाई थी.

 

मामले में सरकार की ओर से एकल पीठ में संशोधन याचिका दाखिल कर वन विभाग में 10 जून को प्लान और नन प्लान मद की राशि के भुगतान पर से लगाई गई रोक को हटाने का आग्रह किया गया था. सरकार की ओर से शपथ पत्र दाखिल कर बताया गया था कि आनंद कुमार को उनके बकाए की राशि का भुगतान कर दिया गया है. 

 

दरअसल, हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की कोर्ट ने बकाया वेतन का भुगतान से संबंधित  तत्कालीन रेंज फॉरेस्ट ऑफीसर (अब सेवानिवृत) आनंद कुमार की अवमानना  याचिका पर सुनवाई करते हुए वन विभाग में सभी तरह के भुगतान पर रोक लगाई थी.

 

पूर्व की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की एकल पीठ में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी  व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए थे.
 
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि विभाग याचिकाकर्ता के बकाया वेतन का भुगतान करने के लिए तैयार है, हालांकि यह भुगतान इससे संबंधित एक अपील (एल.पी.ए. संख्या 216/2025 ) के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगा. 

 

सरकार ने यह भी बताया था कि पेंशन एवं अन्य सेवा लाभों को लेकर पहले पारित आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की गई है, जिस पर 13 फरवरी 2026 को स्थगन आदेश पारित किया गया है.

 

कोर्ट ने विभागीय सचिव द्वारा दिए गए आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए निर्देश दिया था कि याचिकाकर्ता के बकाया वेतन की राशि डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से एक सप्ताह के भीतर झारखंड हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय में जमा कराई जाए. लेकिन सरकार की ओर से आनंद कुमार के बकाए की राशि जमा नहीं कराई गई थी. कहा गया था कि उनकी इस राशि का भुगतान कर दिया गया है.

 

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

Comments
Leave a Comment
Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही