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सिकिदिरी हाइडल प्रोजेक्ट घोटाला: बिजली बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष की याचिका पर HC ने फैसला रखा सुरक्षित

Ranchi News: शिवेंद्र नाथ वर्मा पर आरोप है कि उन्होंने दर की तर्कसंगतता की जांच किए बिना और बोर्ड के अन्य इंजीनियरों के अनुमान (4.88 करोड़) को दरकिनार कर ऊंची दरों पर मंजूरी दी. साथ ही, बिना बैंक गारंटी के 20 फीसदी अग्रिम भुगतान का भी आदेश दे दिया.
 
स्वर्णरेखा पन बिजली परियोजना

Ranchi News: बहुचर्चित सिकिदिरी हाइडल प्रोजेक्ट (स्वर्णरेखा जल विद्युत परियोजना) में हुए करोड़ों रुपये के कथित अनियमितता मामले में झारखंड राज्य बिजली बोर्ड (JSEB) के तत्कालीन अध्यक्ष शिवेंद्र नाथ वर्मा की याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. न्यायमूर्ति अनुभा रावत चौधरी की कोर्ट ने मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया. 

 

सीबीआई की ओर से अधिवक्ता दीपक भारती ने पक्ष रखा. वहीं प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता हिमांशु शेखर ने पक्ष रखा. झारखंड बिजली बोर्ड (JSEB) के पूर्व अध्यक्ष शिवेन्द्र नाथ वर्मा ने CBI के विशेष जज द्वारा डिस्चार्ज याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में आपराधिक रिवीजन याचिका दायर की है.

 

क्या है पूरा मामला 

मामला स्वर्णरेखा हाइड्रो प्रोजेक्ट, सिकिदरी, रांची का है. यहां 65-65 मेगावाट के दो पावर हाउस 1977 और 1980 में BHEL (भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड) ने लगाए थे. ये BHEL ही OEM (Original Equipment Manufacturer) है.


सीबीआई के अनुसार, साल 2011-12 में जेएसईबी के अधिकारियों ने भेल और एनपीईएल के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची. जिस मरम्मत कार्य का अनुमानित बजट महज 2.5 करोड़ रुपए था. उस नियम को ताक पर रखकर 20.87 करोड़ रुपए में भेल को आवंटित कर दिया गया.

 

शिवेंद्र नाथ वर्मा पर आरोप है कि उन्होंने दर की तर्कसंगतता की जांच किए बिना और बोर्ड के अन्य इंजीनियरों के अनुमान (4.88 करोड़) को दरकिनार कर ऊंची दरों पर मंजूरी दी. साथ ही, बिना बैंक गारंटी के 20 फीसदी अग्रिम भुगतान का भी आदेश दे दिया. इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा.

 

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