Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) में विभिन्न प्रबंधकीय पदों के लिए चल रही भर्ती प्रक्रिया रद्द करने के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है. अदालत ने कहा कि केवल भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने या परीक्षा के विभिन्न चरणों में सफल होने से अभ्यर्थियों को नियुक्ति का कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं होता. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने शशि रंजन एवं अन्य की याचिका पर फैसला सुनाया. कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी.
अदालत ने जेएसएलपीएस की ओर से 6 मई 2025 को जारी उस आदेश को बरकरार रखा, जिसके तहत 18 जनवरी 2022 को जारी भर्ती विज्ञापन के आधार पर चल रही भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया था.
याचिकाकर्ताओं ने भर्ती प्रक्रिया रद्द करने के आदेश को चुनौती देते हुए अंतिम परिणाम जारी करने का निर्देश देने की मांग की थी. उनका कहना था कि उन्होंने 24-25 सितंबर 2022 को आयोजित लिखित परीक्षा में सफलता हासिल की थी और आगे ग्रुप डिस्कशन (जीडी) और पर्सनल इंटरव्यू (पीआई) की प्रक्रिया में शामिल हुए थे. इसके बावजूद लंबे समय तक परिणाम घोषित नहीं किया गया और बाद में पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी गयी.
अभ्यर्थियों की ओर से दलील दी गयी कि भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी. ऐसे में बिना उचित कारण पूरी प्रक्रिया रद्द करना मनमाना और अन्यायपूर्ण है. इससे अभ्यर्थियों की वैध अपेक्षा प्रभावित हुई है.
परियोजनाएं बंद होने से खत्म हो गयी पदों की जरूरत
जेएसएलपीएस की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित पद विभिन्न परियोजनाओं और कार्यक्रमों के तहत संविदा आधार पर निर्धारित अवधि के लिए थे. भर्ती प्रक्रिया लंबे समय तक लंबित रहने के दौरान JOHAR और NRETP परियोजनाएं क्रमशः जून और जुलाई 2023 में पूरी हो गयीं. वहीं, महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना (MKSP) और NRETP के संबंध में ग्रामीण विकास मंत्रालय, नयी दिल्ली से भी परियोजनाओं के पूरा होने की सूचना प्राप्त हुई थी.
अदालत ने पाया कि परियोजनाओं के समाप्त होने के बाद उनसे जुड़े कुछ पदों पर नियुक्ति की आवश्यकता भी समाप्त हो गयी. इसके अलावा चयन एजेंसी में बदलाव और भर्ती प्रक्रिया के लंबे समय तक लंबित रहने को देखते हुए जेएसएलपीएस ने प्रशासनिक कारणों से भर्ती रद्द करने का निर्णय लिया.
अदालत ने मौजूदा मामले में परियोजनाओं के बंद होने, चयन एजेंसी में बदलाव और भर्ती प्रक्रिया के लंबे समय तक लंबित रहने जैसे कारणों को देखते हुए जेएसएलपीएस के निर्णय को अधिकार क्षेत्र में और गैर-मनमाना माना.
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