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नाबालिग लापता केस में HC की मौखिक टिप्पणी, क्यों गुमशुदगी के हर मामले में बोकारो पुलिस के हाथ हैं खाली

  •  3 सप्ताह में सीआईडी मामले में अपनी प्रगति दिखाएं
  • सीआईडी जांच संतोषजनक नहीं हुई तो स्टेट एजेंसी और सीबीआई को साथ मिलकर जांच करने का दिया जा सकता है आदेश  
  •  पुलिस खुद मान रही है कि यह अपहरण का मामला हो सकता है
  • बोकारो के पूर्व व वर्तमान एसपी और डीएसपी ऐसे लापता मामलों के खुलासे पर ध्यान नहीं दे रहे हैं

Ranchi :   झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2020 में बोकारो से 14 वर्षीय नाबालिग के लापता मामले में बोकारो पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाया है. हाईकोर्ट ने मौखिक कहा है कि क्यों बच्ची या युवती के हर गुमशुदा मामले में बोकारो पुलिस के हाथ खाली रह जा रहे हैं.

 

बोकारो के पूर्व व वर्तमान एसपी और डीएसपी ऐसे लापता मामलों के खुलासे पर ध्यान नहीं दे रहे हैं. पुलिस खुद मान रही है कि यह अपहरण का मामला हो सकता है,. लेकिन अनुसंधान उस दिशा में नहीं किया.

 

कोर्ट ने कहा कि 3 सप्ताह में सीआईडी मामले में अपनी प्रगति दिखाएं. इस मामले में अगर सीआईडी जांच भी संतोषजनक नहीं पाए गए तो स्टेट एजेंसी और सीबीआई को साथ मिलकर इसकी जांच करने का आदेश दिया जा सकता है.

 

मामले में हाईकोर्ट के न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद एवं न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि उक्त बच्ची के गुमशुदा होने के संबंध में वर्ष 2020 में प्राथमिकी दर्ज कराई गई. जिसमें पुलिस ने तीन लोगों का नार्को टेस्ट भी कराया था. लेकिन एक को खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए छोड़ दिया गया.

 

जब बच्ची के लापता होने के कई वर्ष गुजर गए तो बोकारो पुलिस की असफलता को छुपाने के लिए मामले को अप्रैल 2026 में  सीआईडी को दे दिया. कोर्ट ने मामले में प्रस्तुत की गई सीआईडी की केस डायरी का अध्ययन करने के बाद कहा कि मामले में अनुसंधान सही दिशा में प्रतीत नहीं हो रहा है. 

 

कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 8 जून निर्धारित की.  कोर्ट इस मामले की सुनवाई बोकारो की 18 वर्षीय युवती के लापता होने से संबंधित मामले के साथ उसी दिन करेगी. मामले को प्रार्थी के अधिवक्ता विनसेंट रोहित  मार्की ने पक्ष रखा. 


बता दें कि  नाबालिग के लापता होने को लेकर उसकी मां ने बोकारो के पिंडराजोड़ा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी. पुलिस ने पिंडराजोड़ा थाना में कांड संख्या 161/2020 दर्ज किया था. इस मामले में पुलिस ने मामले में चार संदिग्ध भी पकड़ा भी था, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया.  5 साल से अधिक समय से उस नाबालिग का कोई पता नहीं चल पाया है.  यहां बता दें कि  लड़की की मां  की ओर से अपने बच्ची को खोजने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की  गई है.

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