Ranchi News: फार्मेसी काउंसिल में प्रशांत पांडे की नियुक्त पर कोर्ट में सरकार ने अलग-अलग राय व्यक्त की है. एक मामले में विभाग ने रजिस्ट्रार के पद पर पांडेय की नियुक्ति सिर्फ छह महीने के लिए किये जाने की बात कही है. जबकि दूसरे मामले में यह कहा है कि छह महीने के बाद उसकी नियुक्ति स्वतः समाप्त नहीं हो जाती. दोनों ही शपथ पत्र उप सचिव संध्या मुंडू ने दायर किया है.
झारखंड फार्मेसी काउंसिल के मामले में फिलहाल हाईकोर्ट में दो याचिकाओं की सुनवाई चल रही है. एक याचिका (6423/2026) प्रशांत पांडेय बनाम राज्य सरकार से संबंधित है. प्रशांत पांडेय ने रजिस्ट्रार के पद से हटाये जाने के बाद यह याचिका दायर की है. दूसरी याचिका (6792/2025) गुलाम सरवर बनाम राज्य सरकार है. इस याचिका में छह महीने के बाद रिक्त हुए रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्ति करने और काउंसिल का चुनाव कराने की मांग की गयी है.
प्रशांत पांडेय बनाम राज्य सरकार के मामले में संध्या मुंडू द्वारा दायर शपथ पत्र में कहा गया है कि 14 अक्टूबर 2024 को प्रशांत पांडेय की नियुक्ति औपबंधित रूप से छह महीने के लिए की गयी थी. किसी को इस पद पर लगातार बने रहने का वैधानिक अधिकार नहीं है. पांडेय के खिलाफ प्रशानिक सहित अन्य मामलों में अनियमितता के आरोप है. इसलिए विभाग ने उसे पद से हटाकर 17 अगस्त 2026 को कार्यकारी व्यवस्था के तहत रंजीत चौधरी को रजिस्ट्रार सह सचिव के पद पर नियुक्त किया है. इस शपथ पत्र में सरकार ने प्रशांत पांडे के खिलाफ मिली शिकायतों को भी संलग्न किया है.
गुलाम सरवर बनाम राज्य सरकार की याचिका में दो मुख्य मांग की गयी है. इसमें फार्मेसी काउंसिल का चुनाव कराने और रजिस्ट्रार के रिक्त पद पर नियमित नियुक्ति करने की मांग शामिल है. याचिकादाता की ओर से कहा गया है कि प्रशांत की नियुक्ति औपबंधिक रुप से छह महीने के लिए हुई थी. छह महीने की अवधि समाप्त होने के बाद यह पद रिक्त है. सरकार इस पर नियमित नियुक्ति कराये.
इस याचिका में संध्या मुंडू की ओर से दायर शपथ पत्र में यह कहा गया कि प्रशांत पांडे की नियुक्ति छह महीने के लिए औपबंधिक तौर पर की गयी थी. नियुक्ति का यह आदेश इस मामले में दूसरा आदेश जारी होने तक प्रभावी था. छह महीने की अवधि समाप्त होने पर प्रभार अपने आप समाप्त नहीं होता है. इसलिए नियुक्ति के छह महीने बाद भी काउंसिल के रजिस्ट्रार सह सचिव के रूप में किया गया काम कानून रूप से वैध है. छह महीने का समय नियमित नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए दिया गया था.
उल्लेखनीय है कि प्रशांत पांडे द्वारा बरती गयी अनियमितता के मद्देनजर और छह महीने के बाद भी पद पर बने रहने के मामले में विधानसभा में कई बार सवाल उठा था. विधानसभा में उठाये गये सवालो पर विभाग स्पष्ट जवाब देने से बचता रहा. बाद में विधायक सरयू राय के सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री ने जांच कराने और कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था. इसके बाद भी काफी दिनों तक विभाग इस मामले को टालता रहा. लेकिन अगस्त 2026 में पांडेय को पद से हटाने का आदेश दिया.
हालांकि प्रशांत पांडे अब भी इस पद पर कार्यरत हैं. गुलाम सरवर बनाम राज्य सरकार के मामले में दायर शपथ पत्र से यह पता चलता है कि स्वास्थ्य विभाग फिर प्रशांत पांडेय के साथ खड़ा हो गया है.
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