सत्र : लोकसभा अध्यक्ष ने सर्वदलीय बैठक बुलाई, गतिरोध दूर, अब सदन की कार्यवाही बाधित नहीं होगी
जानें किसने क्या कहा
मौके पर डॉ. गगन गुंजन ने कहा कि, माइक्रोप्लास्टिक जिसमें हानिकारक रसायन होते हैं, हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में जमा हो सकते हैं और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं, जैसे कैंसर और हृदय रोग का कारण बन सकते हैं. हमें प्लास्टिक उपयोग को कम करने, जागरूकता फैलाने और टिकाऊ समाधान अपनाने की दिशा में तुरंत कदम उठाने होंगे. डॉ. अत्री गंगोपाध्याय ने कहा, हमारी सांस लेने की हवा की गुणवत्ता सीधे हमारे फेफड़ों के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है और प्लास्टिक प्रदूषण, विशेष रूप से माइक्रोप्लास्टिक, इसमें एक नया और चिंताजनक कारक बन गया है. यह अब न केवल पर्यावरणीय बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है. डॉ. ओपी महंसरिया ने कहा, बच्चे माइक्रोप्लास्टिक के हानिकारक प्रभावों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं. यह उनके विकासशील शरीर में जमा होकर हार्मोनल असंतुलन, प्रतिरक्षा प्रणाली में गड़बड़ी और मस्तिष्क विकास को प्रभावित कर सकता है. आईकैन के सह-अध्यक्ष अजय मित्तल ने कहा, प्लास्टिक प्रदूषण और माइक्रोप्लास्टिक्स हमारे जीवन में चुपके से घुसपैठ कर चुके हैं, जो न केवल पर्यावरण बल्कि हमारे स्वास्थ्य को भी गहराई से प्रभावित कर रहे हैं. आईकैन के रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में प्रति व्यक्ति ठोस कचरा उत्पादन 425 ग्राम प्रतिदिन है, जबकि रांची में यह 494 ग्राम है. रांची हर साल 365 टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न करता है. झिरी डंपिंग यार्ड, जो 41 एकड़ में फैला हुआ है, झारखंड के सबसे बड़े डंप यार्ड में से एक है, यहां लाखों टन कचरा जमा हो चुका है, जो मिट्टी और पानी को प्रदूषित करता है और स्वास्थ्य को खतरे में डालता है. इसे भी पढ़ें -रामगढ़:">https://lagatar.in/ncc-cadets-visited-prc-and-jspl/">रामगढ़:NCC कैडेटों ने PRC व JSPL का किया विजिट [wpse_comments_template]
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