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फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार प्रशांत पांडेय के सामने स्वास्थ्य मंत्री इरफान हैं लाचार

Ranchi: स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार प्रशांत पांडेय के सामने स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह लाचार है. स्वास्थ्य विभाग दो साल से इस पर किसी को नियुक्त नहीं कर रहा है. इसके अलावा इस व्यक्ति पर लगे आरोपों से संबंधित जांच रिपोर्ट पर पर्दा डाल रहा है.
 
फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार प्रशांत पांडेय के सामने स्वास्थ्य मंत्री इरफान हैं लाचार

Ranchi: स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार प्रशांत पांडेय के सामने स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह लाचार है. स्वास्थ्य विभाग दो साल से इस पर किसी को नियुक्त नहीं कर रहा है. इसके अलावा इस व्यक्ति पर लगे आरोपों से संबंधित जांच रिपोर्ट पर पर्दा डाल रहा है. इस व्यक्ति को कार्रवाई से बचाने के उद्देश्य से विभाग ने विधानसभा में उठाये गये सवालों का सही जवाब नहीं दिया.


फार्मेसी काउंसिल में रजिस्ट्रार के पद पर प्रशांत पांडेय की नियुक्ति छह महीने के लिए की गयी थी. 14-10-2024 को जारी नियुक्ति आदेश में इस बात का उल्लेख किया गया था कि छह महीने में निबंधक सह सचिव के पद पर नियमित नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर ली जायेगी. विभाग द्वारा जारी इस आदेश में प्रशांत कुमार पांडेय को दिया गया प्रभार औपबंधिक करार दिया गया था. साथ ही यह भी कहा गया था कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पाये जाने पर तत्काल प्रभाव से औपबंधिक प्रभार को समाप्त कर दिया जायेगा.

 

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आरोप संख्या 3,4,5,6 की जांच रिपोर्ट


लेकिन स्वास्थ्य विभाग अपरिहार्य कारणों से दो साल बाद भी काउंसिल में रजिस्ट्रार के पद पर नियमित नियुक्ति नहीं कर रहा है, ताकि प्रशांत पांडेय को इस पद पर अपने ही आदेश के खिलाफ बनाये रखा जा सके. प्रशांत पांडेय के मामले में विधानसभा में वर्ष 2025 और 2026 में दो बार सवाल उठा था. लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने विधानसभा को आधे-अधूरे जवाब भेजे. 

 

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स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार प्रशांत पांडेय का नियुक्ति पत्र


वर्ष 2026 में विधायक सरयू राय ने अपने सवाल का सही जवाब नहीं मिलने पर आपत्ति दर्ज करायी. इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने विधानसभा में मामले की जांच कराने और कार्रवाई करने का आश्वासन दिया. लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ. यानी मंत्री भी प्रशांत के सामने लाचार हैं.

 

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जांच होने के बावजूद जांच नहीं होने से संबंधित पत्र

 

प्रशांत पांडेय के खिलाफ अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाये गये थे. वर्ष 2024 में इससे संबंधित जांच का आदेश दिया गया था. जांच पूरी हो चुकी है. इससे संबंधित रिपोर्ट भी स्वास्थ्य निदेशालय के पास है. लेकिन निदेशालय द्वारा शिकायतों की आंशिक जांच होने की बाद स्वीकार की जाती है. इसके लिए यह तर्क दिया जाता है कि पांडेय पर लगे आरोप संख्या 3,4,5,6 की जांच पूरी नहीं हो सकी है. क्योंकि इससे संबंधित दस्तावेज काउंसिल के रजिस्ट्रार द्वारा उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है. 


इस प्रकरण में सबसे हास्यास्पद बात यह है कि आरोपों से संबंधित दस्तावेज प्रशांत पांडेय से ही मांगी जा रही है. जांच अधिकारियों की इतनी हिम्मत नहीं है कि काउंसिल से संबंधित दस्तावेज जब्त कर ले.

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