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धोखाधड़ी मामला : प्रेमसंस मोटर के डायरेक्टर समेत 4 आरोपियों की अग्रिम जमानत पर सुनवाई पूरी, आदेश सुरक्षित

कोर्ट-कचहरी की खबरें

Ranchi : प्रेमसंस मोटर के डायरेक्टर समेत 4 के खिलाफ चुटिया थाना में नामजद आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका पर अपर न्यायायुक्त देवाशीष महापात्र की अदालत में सुनवाई हुई. मामले में दोनों पक्षों की दलील पूरी होने के बाद कोर्ट में फैसला सुरक्षित रख लिया. 


प्रेमसंस मोटर के डायरेक्टर समेत 4 हैं आरोपी    

धोखाधड़ी से जुड़े इस मामले में प्रेमसंस मोटर के डायरेक्टर पुनीत पोद्दार के अलावा अवध पोद्दार, कंपनी के नेक्सा शोरूम के सेल्स मैनेजर शैलेश कुमार और जनरल मैनेजर लिंगराज पट्टाजोशी आरोपी हैं. विवेक आर्या ने चुटिया थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में प्रेमसंस मोटर पर ग्राहकों से प्रति कार 1.20 लाख रुपये की ठगी करने का आरोप लगाया है. विवेक ने थाने में दर्ज प्राथमिकी में कंपनी पर ग्राहकों से सालाना 3600 करोड़ रुपये की ठगी का उल्लेख किया है. 


दरअसल, विवेक आर्या के भाई ने प्रेमसंस मोटर से एक कार खरीदने के लिए पैसे का भुगतान किया था. लेकिन कार की डिलीवरी करने के बजाए डील कैंसिल कर पैसे वापस कर दी गई थी. 


क्या है मामला 

विवेक द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में यह कहा गया है कि वह प्रेमसंस मोटर के नेक्सा शोरूम में अपने भाई दयानंद कुमार के नाम पर कार बुक करने गए थे. उन्होंने डेल्टा मॉडल की कार पसंद की. उन्हें कार की कीमत 13,59,081 रुपये बताई गई.

 

विवेक को पुरानी कार को बदलना था. पुरानी कार की कीमत 6.40 लाख रुपये आंकी गई. एक्सचेंज बोनस के रूप में 90 हजार रुपये बताई गई. एक्सचेंज वैल्यू और पुरानी कार की कीमत को नयी कार की कीमत में घटाने पर उन्हें 6,29,091 रुपये देना था.

 

इसके बाद उन पर कंपनी के माध्यम से ही इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने के लिए दबाव बनाया गया. उन्होंने कुल 3,33,599 (33,599 और 3,00000) रुपये कंपनी में जमा कराया. 


प्राथमिकी में यह भी आरोप लगाया गया है कि उनकी पुरानी कार के लिए तय की गयी 6.40 लाख रुपये में से 10 हजार रुपये एडजस्ट नहीं किया जा रहा था. विवाद के इस मुद्दे पर बातचीत चल ही रही थी कि कंपनी ने उनकी अनुमति के बिना ही कार का रजिस्ट्रेशन करा दिया. इसकी जानकारी उन्हें बाद में मिली. 18 अप्रैल 2025 को वह कार की डिलीवरी लेने गए. उस वक्त उनसे 1.70 लाख रुपये जमा कराया गया. 

 

इसके बाद उन्होंने अपने द्वारा जमा कराए गए पैसों का पूरा बिल मांगा. लेकिन कंपनी ने उन्हें बिल नहीं दिया. बिल के नाम पर रात के आठ बजे तक बैठाये रखा. इसके बाद उन्हें पूरा डिटेल मेल पर भेजने की बात कही गई. लेकिन दूसरे दिन उन्हें मेल कर कार के सिलसिले में किये गये लेन-देन के रद्द करने की जानकारी दी गई.
 

विवेक ने कंपनी लेन-देन रद्द करने के बाद कंपनी द्वारा दिये गये बिल और लेन-देन के हिसाब को देख कर इस बात की गणना की कि उनसे 1.20 लाख रुपये ज्यादा लिया गया. इस तरह विवेक ने कंपनी की सालाना बिक्री के आधार पर यह अनुमान लगाया है कि कंपनी सालाना 3600 करोड़ रुपये का घोटाला कर लोगों के साथ ठगी करती है.

 

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