इसे भी पढ़ें : कस्टोडियल">https://lagatar.in/gujarat-number-one-maharashtra-second-in-terms-of-custodial-death-ncrb-report/">कस्टोडियलसुप्रीम कोर्ट संविधान की प्रस्तावना से `समाजवाद` और `धर्मनिरपेक्षता` को हटाने की मांग वाली सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर 23 सितंबर को सुनवाई करेगा https://t.co/oiK4SkSks5
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— Subramanian Swamy (@Swamy39) September">https://twitter.com/Swamy39/status/1565729626629910528?ref_src=twsrc%5Etfw">September
2, 2022
डेथ के मामले में गुजरात नंबर वन, महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर : NCRB की रिपोर्ट
डॉ बी आर अम्बेडकर ने इन शब्दों को शामिल करने से इनकार कर दिया था
जान लें कि इस मामले में दूसरे याचिकाकर्ता एडवोकेट सत्य सभरवाल हैं. याचिका में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय में 1976 में 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से प्रस्तावना में समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता शब्दों को जोड़ने की वैधता को चुनौती दी गयी थी. इस मामले में तर्क दिया गया है कि इस तरह शब्दों को जोड़ना अनुच्छेद 368 के तहत संसद की संशोधन शक्ति से परे है. याचिकाकर्ताओं के अनुसार संविधान निर्माताओं का इरादा कभी भी लोकतांत्रिक शासन में समाजवादी या धर्मनिरपेक्ष अवधारणाओं को पेश करने का नहीं था. कहा गया है कि डॉ बी आर अम्बेडकर ने इन शब्दों को शामिल करने से इनकार कर दिया था. क्योंकि संविधान नागरिकों के चयन के अधिकार को छीनकर कुछ राजनीतिक विचारधाराओं पर जोर नहीं दे सकता. इसे भी पढ़ें : सुप्रीम">https://lagatar.in/supreme-court-disposed-of-1293-cases-in-last-4-days-out-of-which-440-transfer-cases/">सुप्रीमकोर्ट ने पिछले 4 दिनों में 1293 मामले निपटाये, इनमें 440 ट्रांसफर केस

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