NewDelhi : समलैंगिक विवाह यानी पुरुष से पुरुष और स्त्री से स्त्री के विवाह को कानूनी मान्यता दिये जाने या नकारे जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संवैधानिक बेंच में सुनवाई शुरू हो गयी है. सुनवाई के क्रम में याचिकाकर्ताओं के वकील मुकुल रोहतगी ने समलैंगिक विवाह को मान्यता देने की मांग की. साथ ही SC को सुझाव दिया कि कानून में पति-पत्नी की जगह जीवनसाथी यानी स्पाउस शब्द का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसे भी पढ़ें : सुप्रीम">https://lagatar.in/supreme-court-will-hear-on-24th-the-petition-requesting-independent-investigation-of-atiq-ashrafs-murder/">सुप्रीम
कोर्ट अतीक-अशरफ की हत्या की स्वतंत्र जांच का अनुरोध करने वाली याचिका पर 24 को करेगा सुनवाई
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अनुच्छेद 14 के अनुसार समानता के अधिकार की रक्षा हो जायेगी
तर्क दिया कि इससे संविधान की प्रस्तावना और अनुच्छेद 14 के अनुसार समानता के अधिकार की रक्षा हो जायेगी. लेकिन केंद्र की ओर से दलील पेश करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिकाओं को खारिज करने की मांग की. तुषार मेहता ने फिर एक बार सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर की बात कहते हुए कहा कि जब तक राज्य इसमें सीधे न जुड़े तब तक इस पर सुनवाई करना उचित नहीं होगा. इससे पहले याचिकाकर्ताओं के वकील मुकुल रोहतगी ने 377 के अपराध के दायरे से बाहर किये जाने के मुद्दे से अपनी दलील शुरू की. कहा कि समलैंगिकों को गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार, निजता का सम्मान और अपनी इच्छा से जीवन जीने का अधिकार मिलना चाहिए. इसे भी पढ़ें : शिक्षकों">https://lagatar.in/clear-the-way-for-the-appointment-of-teachers/">शिक्षकोंकी नियुक्ति का रास्ता साफ।। IAS छवि रंजन को ईडी का समन।। छात्रों पर लाठीचार्ज।। झारखंड की महत्वपूर्ण धरोहर खुखरागढ़ समेत कई अहम खबरें पढ़ें अपने प्रिय अखबार शुभम संदेश में
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