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— ANI (@ANI) October">https://twitter.com/ANI/status/1580831220971474945?ref_src=twsrc%5Etfw">October
14, 2022
के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की सुरक्षा Z से बढ़ाकर Z+ किये जाने की खबर
मोदी सरकार की इस योजना को 2017 में ही चुनौती दी गयी थी
खबरों के अनुसार सुनवाई के क्रम में वकील प्रशांत भूषण ने इसे बॉन्ड का गलत उपयोग करार दिया था. आरोप लगाया था कि इसके उपयोग शेल कंपनियां कालेधन को सफेद बनाने में कर रही हैं. कहा था कि बॉन्ड कौन खरीद रहा है, इसकी जानकारी सिर्फ सरकार को होती है. चुनाव आयोग तक इससे जुड़ी कोई जानकारी हासिल नहीं कर सकता है. प्रशांत भूषण ने इसे राजनीतिक दलों को रिश्वत देने का एक तरीका कहा था. जान लें कि मोदी सरकार की इस योजना को 2017 में ही चुनौती दी गयी थी, हालांकि सुनवाई 2019 में शुरू हुई. सुनवाई के क्रम में 12 अप्रैल, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी राजनीतिक दलों को निर्देश दिया कि वे 30 मई, 2019 तक में एक लिफाफे में चुनावी बॉन्ड से जुड़ी सभी जानकारियां चुनाव आयोग को दें. हालांकि, कोर्ट ने इस योजना पर रोक नहीं लगाई थी इसे भी पढ़ें : गुजरात-हिमाचल">https://lagatar.in/declaration-of-dates-for-gujarat-himachal-pradesh-elections-is-possible-today-ecs-press-conference-at-3-oclock/">गुजरात-हिमाचलप्रदेश के विस चुनाव की तारीखों की घोषणा आज संभव, EC की प्रेस कॉन्फ्रेंस तीन बजे
चुनाव आयोग और रिजर्व बैंक की चिंताओं को केंद्र सरकार ने दरकिनार किया
दिसंबर, 2019 में याचिकाकर्ता एसोसिएशन फॉर डेमोक्रटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने इस योजना पर रोक लगाने के लिए एक आवेदन दायर किया. इसमें मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से कहा गया कि किस तरह चुनावी बॉन्ड योजना पर चुनाव आयोग और रिजर्व बैंक की चिंताओं को केंद्र सरकार ने दरकिनार किया था.इस केस पर सुनवाई के दौरान पूर्व CJI एसए बोबडे ने कहा था कि मामले की सुनवाई जनवरी 2020 में होगी. चुनाव आयोग की ओर से जवाब दाखिल किये जाने को लेकर सुनवाई फिर से स्थगित कर दी गयी. इसके बाद मामले पर अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई. इसे भी पढ़ें : कर्नाटक">https://lagatar.in/karnataka-congresss-bharat-jodo-yatra-begins-from-rampura-will-enter-andhra-pradesh/">कर्नाटक: कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा रामपुरा से शुरू हुई, आंध्र प्रदेश में प्रवेश करेगी

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