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सुप्रीम कोर्ट में पूजा स्थल अधिनियम को लेकर 11 अक्टूबर से सुनवाई, ज्ञानवापी और मथुरा विवाद में अहम भूमिका

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NewDelhi : पूजा स्थल अधिनियम 1991 को लेकर खबर आयी है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं को स्वीकार कर लिया है. SC इन अर्जियों पर 11 अक्टूबर से सुनवाई करेगा. बता दें कि तीन जजों की बेंच इस अहम मसले की सुनवाई करेगी. अदालत द्वारा इन याचिकाओं को लेकर नोटिस भी जारी कर दिये गये हैं. अर्जी दाखिल करने वाले एक याची ने कहा कि काशी और मथुरा की अदालतों ने इसी अधिनियम का जिक्र करते हुए फैसले सुनाये हैं. CJI यूयू ललित ने कहा कि कि सुप्रीम कोर्ट काशी और मथुरा की अदालतों की ओर से जारी सुनवाई पर रोक नहीं लगायेगा. कहा कि जिला अदालतों में चल रही सुनवाइयों को जारी रखने दिया जाये. इसे भी पढ़ें : क्वीन">https://lagatar.in/national-mourning-in-india-on-the-death-of-queen-elizabeth-the-tiranga-will-be-half-bowed-on-september-11/">क्वीन

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केंद्र सरकार द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया है

चीफ जस्टिस ने कहा कि इस मामले में अब तक केंद्र सरकार द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया है. सॉलिसिटर जनरल ने इस मामले में जवाब देने के लिए और ज्यादा वक्त की मांग की है. जान लें कि पूजा स्थल अधिनियम संसद से 18 सितंबर, 1991 को पारित किया गया था. 1991 में लागू किया गया. यह प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट कहता है कि 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आये किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता. ज्ञानवापी मस्जिद और कृष्णजन्मभूमि-ईदगाह प्रकरण की सुनवाई में इस अधिनियम का कई बार जिक्र हुआ है. इसे भी पढ़ें : नूपुर">https://lagatar.in/supreme-court-refuses-to-hear-plea-seeking-arrest-of-nupur-sharma-asked-to-withdraw/">नूपुर

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