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मदद या मजाक : कहां से लाएंगे 8.5 लाख

  • रांची के आनि और भुसुर में 4400 फ्लैट बनाने की है योजना
  • फ्लैट के लिए 8.5 लाख रुपये देने होंगे लाभार्थियों को
Satya Sharan Mishra Ranchi : प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) ने गरीबों को पक्के आशियाने का ख्वाब तो दिखाया लेकिन इनकी कीमतों ने उनकी गरीबी का मजाक बनाकर रख दिया है. टू बीएचके फ्लैट के लिए इन गरीबों को 8.5 लाख रुपये अदा करने होंगे. दो वक्त की रोटी भी बामुश्किल जुटा पाने वाले ये गरीब 8.5 लाख रुपये कहां से लाएंगे, यह सबसे बड़ा सवाल है. ऐसे में फिलहाल गरीबों ने इन आवासों से दूरी बना ली है और सरकारी योजना अपने लक्ष्य से भटकती दिखाई दे रही है. यह हम नहीं कह रहे बल्कि वे गरीब कह रहे हैं जिन्हें रांची के आनि और भुसुर में योजना के तहत फ्लैट देने की तैयारी की जा रही है. बेबस गरीबों का कहना है कि अगर उनके पास 8.5 लाख रुपये होते तो वे स्वयं ही अपने आशियाने का ख्वाब पूरा कर सकते थे. साथ ही उनकी यह भी शिकायत है कि पीएम आवास योजना के तहत 320 वर्ग फुट एरिया में फ्लैट बनाए जा रहे हैं. इतने छोटे से फ्लैट में उनका 6 से 10 सदस्यीय परिवार कैसे गुजारा करेगा.

इन्हें फ्लैट में शिफ्ट करने की है योजना

रांची के आनि और भुसूर में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत 4400 गरीब परिवारों के लिए फ्लैट बनाने की योजना है. पिछले कुछ दशकों में धुर्वा के अलग-अलग इलाकों में हजारों लोगों ने एचईसी की जमीन पर कब्जा करके स्लम बस्तियां बना ली हैं. इनमें से अधिकांश लोग बिहार और यूपी के हैं. कई लोग एचईसी कर्मचारियों के वंशज या रिश्तेदार हैं. एचईसी में नौकरी मिलने के बाद कर्मचारियों को एक क्वार्टर मिला था, लेकिन धीरे-धीरे उनका परिवार बढ़ा और रहने की जगह कम पड़ गई. ऐसे में लोगों ने एचईसी की खाली जमीन पर अस्थाई झुग्गी-झोपड़ियां बना लीं. धीरे-धीरे उनका परिवार बढ़ता गया और झोपड़ियों की संख्या भी. नगर विकास विभाग ने इन्हीं झोपड़ियों में रहने वाले परिवारों के लिए आनि और भुसूर में 4400 फ्लैट बनाने की योजना बनाई है,

क्या चाहते हैं गरीब

धुर्वा में एचईसी की जमीन पर भुसूर कोचा, गंगा खटाल, पत्थर कोचा, लंका कॉलोनी, पटेल नगर, ए-टाइप सेक्टर-2 मदरसा, लीची बगान, न्यू एरिया गांधी नगर, सुंदरगढ़ समेत 16 स्लम बस्तियां बसी हैं. इनमें रहने वाले अधिकांश लोग दिहाड़ी मजदूरी और दूसरे के घरों में काम करते हैं. कुछ ऑटो चलाते हैं. कई लोग प्राइवेट गार्ड की नौकरी करते हैं. कुछ लोगों ने दुकान और खटाल खोल रखी है. सभी परिवारों में 4 से 10 सदस्य हैं. इनका कहना है कि उन्हें 8.5 लाख रुपये का फ्लैट नहीं चाहिए. सरकार अगर मेहरबानी ही करना चाहती है तो एचईसी की जमीन पर ही उन्हें रेगुलर कर दे और पक्का मकान बनाने के लिए डेढ़-दो लाख रुपये दे दे.

11 लाख है फ्लैट की कीमत, लाभुक को देने होंगे 8.5 लाख

आनि और भुसूर में प्रस्तावित 4400 फ्लैट 320 वर्गफीट के होंगे. एक फ्लैट की कीमत 11 लाख रुपये होगी. इसमें ढाई लाख रुपये की सब्सिडी केंद्र और राज्य सरकार देगी, जबकि लाभुक को बाकी बचा 8.5 लाख रुपये देने होंगे. यहां कुल 9 मंजिला अपार्टमेंट बनेंगे. हर फ्लैट में लिविंग रूम, बेडरूम, किचन, बाथरूम और टॉयलेट होंगे. बिजली-पानी के साथ अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी. लेकिन सवाल यह है कि गरीब लोग 8.5 लाख रुपये लाएंगे कहां से. अगर बैंक से लोन मिल भी गया तो उसे चुकाएंगे कहां से? [caption id="attachment_576978" align="aligncenter" width="1600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/03/rajkumar_346.jpg"

alt="" width="1600" height="1200" /> राजकुमार[/caption]

मुश्किल से परिवार चल रहा, कैसे खरीदेंगे फ्लैट : राजकुमार

राजकुमार धुर्वा के मामा नगर स्लम बस्ती में पिछले कई सालों से रह रहे हैं. वे अपनी खटाल चलाते हैं. उन्होंने कहा कि 320 वर्ग फीट के फ्लैट के लिए 8.5 लाख रुपये बहुत ज्यादा हैं. हम लोग गरीब आदमी हैं. मुश्किल से परिवार चला पा रहे हैं, फ्लैट के लिए इतना पैसा कहां से लाएंगे. लोन मिल भी गया तो इंस्टॉलमेंट कैसे चुकाएंगे. फ्लैट की कीमत थोड़ी कम होती तो खरीदने की सोच सकते थे. [caption id="attachment_576986" align="aligncenter" width="1600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/03/bhikhari-singh_233.jpg"

alt="" width="1600" height="1200" /> भिखारी सिंह[/caption]

गरीबों के साथ मजाक क्यों : भिखारी सिंह

भिखारी सिंह धुर्वा के साइड 5 बांग्ला स्कूल के पास स्थित स्लम बस्ती में 60 साल से भी ज्यादा समय से रह रहे हैं. फ्लैट मिलने की बात सुनकर काफी खुश होते हैं, लेकिन जब पता चलता है कि एक फ्लैट की कीमत 8.5 लाख रुपये पड़ेगी तो कहने लगे- काहे मजाक कर रहे हैं बाबू गरीब लोगों के साथ. एक तो कीमत इतनी ज्यादा, ऊपर से हमारे परिवार में 8 लोग हैं. इतने छोटे से फ्लैट में हम लोग कैसे रहेंगे. हम लोग यहां खुश हैं. [caption id="attachment_576976" align="aligncenter" width="1600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/03/shubash-kumar_487.jpg"

alt="" width="1600" height="1200" /> सुभाष कुमार[/caption]

थोड़ी कम कीमत होती तो फ्लैट लेने की सोचते : सुभाष

सुभाष कुमार सिंह कदम खटाल बस्ती में रहते हैं. सैटेलाइट कॉलोनी में छोटी से नौकरी करते हैं. कहते हैं, हम लोग मजदूर हैं. इनकम बहुत कम है. 8.5 लाख रुपये फ्लैट में नहीं लगा पाएंगे. वैसे भी 320 वर्ग फुट के फ्लैट की कीमत 4 से 4.5 लाख होनी चाहिए थी. 8.5 लाख में तो 400 वर्ग फुट जगह मिलनी चाहिए. हमारा 7 लोगों का परिवार है. घर भी चलाना है. इतना पैसा नहीं खर्च कर पाएंगे.

अच्छी स्कीम है, लेकिन इतना पैसा हमारे पास नहीं : श्रीराम सिंह

श्रीराम सिंह लंका कॉलोनी में रहते हैं. कहते हैं सरकार का यह स्कीम बहुत अच्छा है लेकिन हम लोग इतना पैसा देने में सक्षम नहीं हैं. ऑटो चलाकर मुश्किल से अपना परिवार पाल रहे हैं. घर का खर्च भी तो देखना है. थोड़ी छोटी राशि होती तो फ्लैट लेने के बारे में सोच भी सकते थे. [caption id="attachment_576977" align="aligncenter" width="1600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/03/anjani-kumar_76.jpg"

alt="" width="1600" height="1200" /> अंजनी कुमार[/caption]

रेट बहुत ज्यादा है : अंजनी

अंजनी कुमार धुर्वा के साइड 5 बांग्ला स्कूल के पास रहते हैं. वे कहते हैं कि रेट बहुत ज्यादा है. ऑटो चलाकर इतना महंगा सपना नहीं देख सकता. अगर रेट थोड़ा कम होता तो खरीदने के बारे में सोचा जा सकता था. हम गरीब लोगों के लिए 8.5 लाख रुपये तो बहुत ज्यादा हैं. इसे भी पढ़ें – ईडी">https://lagatar.in/ed-officials-claim-lalu-family-made-property-worth-600-crores-through-crime/">ईडी

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