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हेमंत को जमानत, मां ने आरती उतारी, पिता का हाल जाना

आदेश के चार तथ्य - हेमंत सोरेन को सीधे तौर पर जमीन के कब्जे से जोड़ने का कोई सबूत नहीं था. - ईडी का यह कहना कि उसके हस्तक्षेप से जमीन पर अवैध कब्जा रूका, यह अस्पष्ट था. - यह मानने का कोई ठोस कारण नहीं है कि हेमंत सोरेन मनी लांड्रिंग के दोषी थे. - पीएमएलए की धारा 45 के तहत दोनों शर्तें पूरी हो चुकी थीं, इसलिए हेमंत सोरेन को रिहा करना पड़ा. Vinit Abha Upadhyay Ranchi : कथित जमीन घोटाला और मनी लांड्रिंग के मामले में हाई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जमानत दे दी है. अब वह बाहर हैं. 50-50 हजार के दो मुचलके पर कोर्ट ने उन्हें जमानत दी. शाम के करीब चार बजे वह जेल से बाहर निकले. हेमंत सोरेन की पत्नी गांडेय विधायक कल्पना सोरेन. भाई बसंत सोरेन समेत पार्टी के अन्य नेता कार्यकर्ता ने जेल से निकलते ही उनका स्वागत किया. हेमंत सोरेन ने हाथ हिलाकर कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया.फिर उनका काफिला जेल परिसर से बाहर निकला. हेमंत सोरेन का काफिला सीधे शिबू सोरेन के घर पर पहुंचा. यहां उनकी मां ने हेमंत सोरेन का आरती उतारी. यह भावुक करने वाला पल था. जिसके बाद हेमंत सोरेन अपने पिता से मिलने पहुंचे. पिता से आर्शिवाद लिया और उनकी तबियत के बारे में जानकारी ली. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2024/06/guru.jpg"

alt="hhh" width="600" height="400" /> हेमंत सोरेन को 31 जनवरी को इंफोर्समेंट डाइरेक्टोरेट (ईडी) ने गिरफ्तार किया था. कई दिनों तक रिमांड पर रख कर इडी ने उनसे पूछताछ की. फिर अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था. वह और उनकी पार्टी यही कहती रही है कि उन्हें गलत तरीके से फंसाया जा रहा है. एक ऐसे मामले में जिसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है. जमानत मिलने के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेताओं और कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है. पार्टी यह भी आरोप लगाती रही है कि केंद्र सरकार के इशारे पर हेमंत सोरेन को फंसाया गया है. लोकसभा चुनाव से दूर रखने के लिए उन्हें गिरफ्तार किया गया है. यह भी एक संयोग ही है कि चुनाव खत्म होने के एक माह के भीतर वह जमानत पर छूटे. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2024/06/guru3.jpg"

alt="hhh" width="600" height="400" /> हेमंत सोरेन को जमानत देते हुए अदालत ने चार प्रमुख बातें कही हैं. पहला यह कि जमीन कब्जा करने में हेमंत का सीधे तौर पर जुड़े नहीं थे, दूसरा ईडी का यह कहना कि उसके हस्तक्षेप से अवैध कब्जा रुका, यह अस्पष्ट है, तीसरा यह मानने का कोई कारण नहीं है कि हेमंत मनी लांड्रिंग के दोषी थे और चौथा यह कि पीएमएलए की धारा 45 में जमानत के लिए जरुरी दो शर्तों को पूरा कर लिया है. https://lagatar.in/wp-content/uploads/2024/06/guru1.jpg"

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कब क्या हुआ

31 जनवरी को हेमंत सोरेन को ED ने देर रात गिरफ्तार किया 22 मई को हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर हुई 13 जून को हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा 28 जून को हाईकोर्ट ने हेमतं को बेल दी 11:38 बजे कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया 1:23 बजे बसंत सोरेन बेल के लिए जरुरी दस्तावेज लेकर कोर्ट पहुंचे 1:47 में हाईकोर्ट के ऑर्डर की कॉपी मिली 3:00 बजे बेल बांड कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया गया 3:37 बजे कोर्ट ने हेमंत की रिहाई का ऑर्डर जारी किया 4.00 बजे करीब होटवार जेल बाहर निकले 4.30 बजे गुरूजी के आवास पहुंचे. [wpse_comments_template]

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