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आरक्षण, नियोजन व स्थानीय नीति के सवाल पर हेमंत सरकार कर रही राजनीति : सुदेश महतो

  • गैर जवाबदेह नेतृत्व और निरंकुश तंत्र से राज्य को हो रहा बड़ा नुकसान 
Giridih : गांडेय में बुधवार को आयोजित जन पंचायत में आजसू पार्टी प्रमुख सुदेश महतो ने कहा कि हेमंत सोरेन की सरकार को जिन भावनाओं का सम्मान और समाधान करना था, उन भावनाओं का इन्होंने राजनीतिकरण कर दिया. इनकी नीतियों से राज्य का एक बड़ा वर्ग नाराज है. छात्र, किसान, श्रमिक, नौजवान अलग-अलग रूप से आंदोलन को बाध्य हैं. निश्चित रूप से इस भारी असंतोष और नाराजगी का राजनीतिक परिणाम आएगा, लेकिन तब तक प्रदेश को बहुत बड़ी क्षति होगी. कहा कि जनचेतना का विस्तार कर बड़े आंदोलन की तैयारी में हम जुटे हैं. प्रगतिशील राजनीति के लिए लोगों को गोलबंद करने की एक बड़ी जिम्मेदारी हम सभी पर है. राज्य का नेतृत्व करने वाले की पृष्ठभूमि संघर्ष से जुड़ा नहीं है. कभी भी आम जनमानस के बीच जाकर जनता की सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक स्थिति का इन्होंने आंकलन नहीं किया. विकास की बुनियाद आधारित राजनीति से इनका कोई वास्ता नहीं.

इस सरकार ने भ्रष्टाचार को शिष्टाचार बना लिया है

सुदेश ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्तासीन पार्टी किसी भी विषय को लेकर गंभीर नहीं है. आंदोलन के समय से लेकर अब तक ये झारखंडी संसाधनों के संरक्षण की बात करते आए हैं, लेकिन असलियत तो ये है कि जब-जब इन्हें मौका मिला, इन्होंने लूट और दोहन के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. सरकार द्वारा जाति, आय, आवासीय प्रमाण पत्र निर्गत करने की तिथि तो निर्धारित कर दी गई है, लेकिन बिना चढ़ावे के कोई कार्य नहीं होता. पंच- पंचायत, ग्राम सभा को लगातार कमजोर करने का प्रयास जारी है. दरअसल इस सरकार ने भ्रष्टाचार को शिष्टाचार बना लिया है. गैर जबावदेह नेतृत्व और निरंकुश तंत्र से राज्य को बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है.

कितनी नौकरियां मिली, सरकार जनता को हिसाब दे

आजसू प्रमुख ने कहा कि हेमंत सरकार सवा तीन साल से स्थानीय नीति, नियोजन नीति और आरक्षण को लेकर सिर्फ राजनीति कर रही है. अगर जनविषयों को लेकर ये संवेदनशील होती, तो मुद्दों को लटकाने की बजाए, उसका हल ढूंढती. ट्रिपल टेस्ट, जातीय जनगणना को लेकर चुप्पी, सरकार की संकुचित मानसिकता को दर्शाता है. राज्य की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चौपट है. सरकार के मुखिया को सामने आकर यहां के युवाओं के सवालों का जवाब देना चाहिए. सवा तीन सालों में कितनी नौकरियां मिली, कितने इंडस्ट्री लगे, कितने रोजगार सृजित हुए, इसका आंकड़ा साझा करना चाहिए. इसे भी पढ़ें – रांची">https://lagatar.in/ranchi-notice-to-rospa-tower-corporation-imposed-a-penalty-of-rs-52-lakh/">रांची

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