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चतरा में सड़क मरम्मत के 52.12 लाख के भुगतान का दावा, हाईकोर्ट ने याचिका की खारिज

Ranchi News: हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आनंदा सेन की अदालत ने बलेश्वर यादव की ओर से दायर याचिका पर यह आदेश दिया. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपने बकाये की राशि के लिए सक्षम सिविल कोर्ट में जाने की स्वतंत्रता दी है. दरअसल, याचिकाकर्ता पंजीकृत ठेकेदार है. उसे पखा से लेरहो स्कूल तक 10.3 किलोमीटर सड़क के मरम्मत कार्य का ठेका मिला था.
 
फाइल फोटो

Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने चतरा में पखा से लेरहो स्कूल तक 10.3 किलोमीटर सड़क की मरम्मत व रखरखाव के बकाये 52.12 लाख रुपये के भुगतान की मांग से जुड़ी याचिका खारिज कर दी. अदालत ने कहा कि ठेकेदार के बकाये की राशि राज्य सरकार ने स्वीकार नहीं की है और सड़क का काम पूरा हुआ या नहीं और उसमें कमियां थीं या नहीं, यह तय करने के लिए साक्ष्य की जरूरत होगी. ऐसे जटिल विवाद का फैसला संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका में नहीं किया जा सकता. 


हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आनंदा सेन की अदालत ने बलेश्वर यादव की ओर से दायर याचिका पर यह आदेश दिया. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपने बकाये की राशि के लिए सक्षम सिविल कोर्ट में जाने की स्वतंत्रता दी है. 

 

दरअसल, याचिकाकर्ता पंजीकृत ठेकेदार है. उसे पखा से लेरहो स्कूल तक 10.3 किलोमीटर सड़क के मरम्मत कार्य का ठेका मिला था. उसका दावा था कि काम पूरा करने के बावजूद 52.12 लाख रुपये का भुगतान लंबित है. साथ ही उसने 8.80 लाख रुपये की सिक्योरिटी राशि, भुगतान से काटी गयी पांच प्रतिशत राशि तथा ब्याज जारी करने की मांग की थी.


ठेकेदार का कहना था कि क्षेत्र उग्रवाद प्रभावित था और काम के लिए सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग के बावजूद प्रशासन ने सुरक्षा नहीं दी. उसके अनुसार, उसने 29 जून 2017 तक काम पूरा कर दिया था. बाद में सड़क के क्षतिग्रस्त होने के मामले में भी उसने विभाग का ध्यान आकृष्ट कराया.
वहीं राज्य सरकार ने इन दावों का विरोध किया. सरकार के अनुसार, करीब 1.75 करोड़ रुपये के समझौता कार्य में निर्धारित समय तक काम पूरा नहीं हुआ. बाद में समय सीमा बढ़ाई गयी, लेकिन इसके बावजूद काम पूरा नहीं किया गया. अधिकारियों के 20 जून 2019 के निरीक्षण में ह्यूम पाइप की पैरापेट अधूरी, प्रीमिक्स निकलने और ह्यूम पाइप टूटने जैसी कमियां पायी गयीं. विभाग का कहना था कि कमियां दूर होने और अंतिम माप लिए जाने तक भुगतान नहीं किया जा सकता.


राज्य ने कोर्ट को बताया कि ठेकेदार को अब तक 1,23,80,413 रुपये का भुगतान किया जा चुका है और उसके अनुसार कोई और राशि देय नहीं है. चूंकि काम अधूरा था, इसलिए माप पुस्तिका में भी अंतिम माप दर्ज नहीं किया गया.

 

अदालत ने पाया कि इस मामले में सरकार ने याचिकाकर्ता की दावा पर की गयी राशि को कहीं स्वीकार नहीं किया है. इसके विपरीत काम अधूरा रहने और निर्माण में कई कमियां होने का स्पष्ट आधार दिया गया है. इन तथ्यों को साबित करने के लिए साक्ष्य की आवश्यकता होगी.

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