- रिम्स में नियुक्तियां, आवश्यक मशीनरी एवं उपकरणों की खरीद व जर्जर भवनों की मरम्मत जैसे कार्य किए जाने हैं
Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स) से जुड़े जनहित याचिका की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई. मामले में रिम्स की ओर से 21 जुलाई को दायर शपथ पत्र पर कोर्ट ने असंतोष जताया.
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि रिम्स में नियुक्तियां करने, आवश्यक मशीनरी एवं उपकरणों की खरीद और जर्जर भवनों की आपातकालीन मरम्मत जैसी महत्वपूर्ण कार्य पूरे नहीं किए गए हैं.
कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र दाखिल कर इन कार्यों को अब तक क्यों नहीं पूरा किया जा रहा है इसका निरीक्षण कर जवाब दाखिल करने को कहा है. साथ ही इस संबंध में शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है. अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी.
रिम्स को विभिन्न कार्यों को पूरा करने के लिए मिला था 3 से 6 माह का समय-विस्तार
18 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने रिम्स के विभिन्न कार्यों के लिए निर्धारित मूल समय-सीमा पर रिम्स के अनुरोध पर 3 से 6 माह तक का समय-विस्तार दिया था.
रिम्स में चिकित्सा संवर्ग (Medical Cadre) के रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए 2 माह (10.10.2025 से) मूल समय-सीमा थी, जिसपर रिम्स की ओर से 6 माह का समय-विस्तार मांगा गया था. सीनियर रेजिडेंट/ट्यूटर की भर्ती के लिए 2 माह (10.10.2025 से) मूल समय-सीमा थी, जिसपर रिम्स की ओर से 3 माह का समय-विस्तार मांगा गया था. वर्ग-III एवं नर्सिंग पदों पर नियुक्ति 2 माह (10.10.2025 से) मूल समय-सीमा थी, जिस पर रिम्स की ओर से 6 माह समय-विस्तार मांगा गया था.
वर्ग-IV के रिक्त पदों पर नियुक्ति
2 माह (10.10.2025 से) मूल समय-सीमा थी, जिस पर रिम्स की ओर से 6 माह समय-विस्तार मांगा गया था. मशीनरी एवं उपकरणों की खरीद 1 माह (10.10.2025 से) मूल समय-सीमा थी, जिस पर रिम्स की ओर से कार्य जारी है कहते हुए अतिरिक्त 6 माह की आवश्यकता बताई गई थी.
रिम्स में भवनों का निर्माण/जीर्णोद्धार 4 माह (10.10.2025 से) मूल समय-सीमा थी, जिस पर रिम्स की ओर से कहा गया था कि इसका अनुपालन झारखंड स्टेट बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा किया जाना है. रिम्स में जर्जर भवनों की आपातकालीन मरम्मत के लिए 4 माह (10.10.2025 से) मूल समय-सीमा थी, जिस पर रिम्स की ओर से 6 माह समय-विस्तार मांगा गया था.
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