Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी 11वीं, 13वीं औऱ स्टेट फुड सेफ्टी ऑफिसर के साथ-साथ सीडीपीओ की नियुक्ति रद्द करने के झारखंड के आदेश को भी स्थगित कर दिया है. हाईकोर्ट के न्यायाधीश दीपक रौशन ने सौरभ सिंह बना राज्य सरकार के मामले की सुनवाई के बाद ( ज्ञापांक-06/लो०से०आ०-01-07/2026 का- 545 रांची, दिनांक 18-8-2026) से स्टेट फुड ऑफिसर की नियुक्ति को रद्द करने के आदेश को स्टे कर दिया है. साथ ही कार्मिक विभाग द्वारा जारी इस नोटिफिकेशन से प्रभावित अन्य को पिटिशिन का निपटारा होने तक काम करने की अनुमति दी है. साथ ही 15 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई के दौरान CID जांच में मिले तथ्यों की जानकरी देने को कहा है.
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उल्लेखनीय है कि कार्मिक विभाग द्वारा जारी आदेश (ज्ञापांक-06/लो०से०आ०-01-07/2026 का- 545 रांची, दिनांक 18-8-2026) से तीन नियुक्तियां रद्द की गयी है. इसमें कार्मिक प्रशासनिक सुधार विभाग ने इस नोटिफिकेशन से तीन नियुक्तियों को रद्द किया है. इस नोटिफिकेशन से विज्ञापन संख्या 18/23 से नियुक्त स्टेट फुड ऑफ़िसर, विज्ञापन संख्या 21/2024 से नियुक्त राज्य सेवा के अधिकारी और विज्ञापन संख्या 21/23 से नियुक्त CDPO प्रभावित हैं.

झारखंड हाई कोर्ट के आदेश की प्रति. 10वें व 11वें पारा में जारी आदेश.
न्यायालय ने अपने फैसले के 10वें बिंदु में यह कहा है कि विज्ञापन संख्या 18/23 से नियुक्त स्टेट फुड ऑफ़िसर की नियुक्ति रद्द करने से संबंधित नोटिफिकेशन को स्टे किया जाता है. स्टे अगले आदेश तक प्रभावित रहेगा. न्यायाधीश ने फैसले के 11 वें बिंदु में सीनियर एडिशनल एडवोकेट जनरल को यह निर्देश दिया है कि वह संबंधित विभाग को यह सूचित करे कि याचिकाकर्ताओं और अन्य लोगों को जो इस तरह की स्थिति में हैं और इस नोटिफिकेशन से प्रभावित हैं, उन्हें रिट याचिका के निपटारा होने तक अपना काम जारी रखने की अनुमति दे.
इसके साथ ही न्यायालय ने पूरे मामले को देखते हुए याचिकाकर्ताओं को यह निर्देश दिया है कि वह इस बात का Affidavit/ Undertaking दें कि आपराधिक मामले में ट्रायल कोर्ट का फैसला उन पर लागू होगा और सरकार क़ानून सम्मत कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी.
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकर्ता की ओर से यह कहा गया था कि वह सभी निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियुक्त हुए थे और नौकरी कर रहे थे. सरकार ने बिना उनका पक्ष जाने नियुक्ति को रद्द कर दिया. सरकार की यह कार्रवाई Natural Justice के नियमों के खिलाफ है.
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कोई शपथ नहीं दायर किया गया था. लेकिन यह कहा गया कि नियुक्तियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है. इसकी गहन जांच की जा रही है. CID ने इस मामले में कई लोगों के गिरफ्तार किया है.

