Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) द्वारा दिए गए मुआवजे की गणना में मृतक राजमिस्त्री की आय को अर्ध-कुशल श्रमिक के रूप में आकलन करके मुआवजा भुगतान करने का आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि मृतक एक राजमिस्त्री था. 1 अक्टूबर 2019 से न्यूनतम मजदूरी अधिनियम से प्रभावी झारखंड न्यूनतम वेतन अधिसूचना के मद्देनजर मृतक की आय का मूल्यांकन अर्ध-कुशल श्रमिक के रूप में किया गया था. झारखंड सरकार ने वर्ष 2019 के दौरान अर्ध-कुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी 7 हजार 8 रुपए 14 पैसा प्रति माह निर्धारित की है और कुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी 9 हजार 2 सौ 38 रुपए मासिक निर्धारित की गई है. मृतक राजमिस्त्री था और न्यायाधिकरण द्वारा राजमिस्त्री को अर्ध-कुशल श्रमिक मानना गलत है. दरअसल वर्ष 2019 में एक मोटर दुर्घटना में 35 वर्षीय व्यक्ति की लापरवाही से चलाए जा रहे ट्रक की चपेट में आने से मौत हो गई. मृतक के परिवार में उसकी पत्नी, बच्चे और माता-पिता हैं, जिन्होंने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 के तहत एक याचिका दायर की, जिसमें मुआवजे के रूप में 30,00,500 रुपये की मांग की गई. मृतक, एक राजमिस्त्री था और वह 15,000 रुपये प्रति महीने कमाता था. हालांकि ट्रिब्यूनल ने माना कि मृतक एक राजमिस्त्री था. लेकिन उनकी आय का मूल्यांकन 1 अक्टूबर 2019 से न्यूनतम मजदूरी अधिनियम से प्रभावी झारखंड न्यूनतम वेतन अधिसूचना के मद्देनजर अर्ध-कुशल श्रमिक के रूप में किया गया था और मुआवजे के रूप में 14,81,200 रुपए देने का आदेश दिया. मुआवजे की राशि बढ़ाने के लिए मृतक के परिजनों ने हाईकोर्ट में गुहार लगाई, जिसपर सुनवाई करते हुए अदालत ने मुआवजा राशि 18,62,400 रुपए करने का आदेश पारित किया है. इस मामले की सुनवाई जस्टिस सुभाष चांद की बेंच में हुई. इसे भी पढ़ें -जेल">https://lagatar.in/the-world-of-jail-is-different-no-innocent-should-have-to-see-these-days-cm/">जेल
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हाईकोर्ट ने दिया- राजमिस्त्री, कुशल श्रमिक, परिजनों को उचित मुआवजा देने का आदेश
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