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कॉन्ट्रेक्ट डॉक्टर नियुक्ति में उम्र सीमा में छूट से हाईकोर्ट का इनकार,सेवा प्रोन्नति में आरक्षण पर फैसला सुरक्षित

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने राजयभर में होने वाली डॉक्टरों की बहाली में उम्र सीमा में छूट दिए जाने की मांग को लेकर दायर याचिका खारिज कर दी है पिछली सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस न्यायमूर्ति एसके द्विवेदी की कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है. इसी वर्ष झारखंड सरकार के द्वारा मेडिकल ऑफिसर्स की नियुक्ति से संबंधित विज्ञापन जारी किया गया था जिसमें अलग अलग वर्ग के लिए उम्र सीमा तय की गयी थी इस बीच रिम्स में कॉन्ट्रेक्ट पर बहाल डॉक्टरों ने रिम्स में उनके द्वारा दी जा रही सेवा को आधार बताते हुए उम्र सीमा में छूट दिए जाने की मांग अदालत से की गयी थी.इस मामले में अभ्यर्थी अमित कुमार सिन्हा समेत अन्य अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए उम्र सीमा में छूट देने की मांग करते हुए अदालत से गुहार लगाई थी जिसपर सभी पक्षों की बहस एवं दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था. इसे भी पढ़ें- नियोजन">https://lagatar.in/supreme-court-refuses-to-stay-the-decision-of-jharkhand-high-court-on-planning-policy/9628/">नियोजन

नीति पर झारखंड हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार वहीं सेवा प्रोनति में आरक्षण का लाभ दिए जाने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति डॉ रविरंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की डबल बेंच में सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.दरअसल यह मामला द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ सिमित प्रतियोगिता परीक्षा से जुड़ा हुआ है जिसके विज्ञापन में कहा गया था की उसी व्यक्ति को आरक्षण का लाभ मिलेगा जिसके पास झारखंड का कास्ट सर्टिफिकेट होगा. बिहार से झारखंड कैडर में तबादला होकर आये अखिलेश प्रसाद द्वारा दायर याचिका में कहा गया था की उन्हें शर्तों के मुताबिक आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए क्योंकि उन्हें बिहार में आरक्षण का लाभ मिल रहा था. इसे भी पढ़ें- नियोजन">https://lagatar.in/jharkhand-government-reaches-supreme-court-against-high-courts-decision-on-planning-policy/5010/">नियोजन

नीति पर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची झारखंड सरकार बता दें की हाईकोर्ट के सिंगल बेच ने अखिलेश प्रसाद एवं अन्य के पक्ष में पूर्व में फैसला सुनाते हुए आरक्षण का लाभ देने का आदेश पारित किया था और हाईकोर्ट के सिंगल बेच के फैसले को जेपीएससी और राज्य सरकार ने चुनौती दी है. राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार और जेपीएससी की तरफ से अधिवक्ता संजोय पिपरवाल ने अदालत में पैरवी की.

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