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हाईकोर्ट ने कहा- दुर्भाग्यपूर्ण है कि पिता और बेटी भद्दी टिप्पणी सुने बिना सड़क पर साथ नहीं चल सकते

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Kochi : केरल हाईकोर्ट ने उस व्यक्ति को अग्रिम ज़मानत देने से इनकार कर दिया, जिसने पिता के साथ कहीं जा रही एक किशोरी पर कथित तौर पर अनुचित टिप्पणी की थी. पिता के विरोध करने पर उनसे मारपीट भी की थी. अदालत ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण  है कि एक पिता और किशोर बेटी भद्दी टिप्पणी सुने बिना सड़क पर एक साथ नहीं चल सकते. हाईकोर्ट ने कहा कि 14 वर्षीय बेटी के खिलाफ भद्दी टिप्पणियों पर आपत्ति जताने पर आरोपी ने कथित तौर पर पिता को हेलमेट से मारा, जिससे वह घायल हो गए.

जमानत याचिका को खारिज कर दिया

जस्टिस गोपीनाथ पी ने तिरुवनंतपुरम की नेमोम पुलिस द्वारा दर्ज मामले में 36 वर्षीय आरोपी शाजिमोन विन्सेंट की गिरफ्तारी से पूर्व जमानत याचिका को खारिज कर दिया. पुलिस ने आरोपी पर गैर इरादतन हत्या करने का प्रयास करने, स्वेच्छा से चोट पहुंचाने, स्वेच्छा से खतरनाक हथियारों या साधनों से चोट पहुंचाने, महिला की मर्यादा का अपमान करने के तहत मामला दर्ज किया था.

यह सब रुकना चाहिए

अदालत ने कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कोई आदमी और उसकी बेटी भद्दी टिप्पणी सुने बिना सड़क पर एक साथ नहीं चल सकते. यह सब रुकना चाहिए.’ वहीं, आरोपी ने दावा किया कि लड़की के पिता ने उस पर और उसके साथ मौजूद एक अन्य व्यक्ति पर हमला किया था. अग्रिम जमानत की मांग करते हुए आरोपी ने दावा किया था कि वह बिल्कुल निर्दोष है और उसे झूठा फंसाया गया है. इसे भी पढ़ें – बदल">https://lagatar.in/the-weather-of-jharkhand-is-changing-some-relief-from-the-heat-due-to-the-rolling-of-clouds/">बदल

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टिप्पणी सुनेगा, तो पिता की यही प्रतिक्रिया होगी

आवेदक ने तर्क दिया कि पिता ने उस पर और उसके दोस्त पर हमला किया था. ऐसा कोई आरोप नहीं है कि पिता पर हमला करने के लिए किसी हथियार का इस्तेमाल किया गया था और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के अनुरूप कोई चोट नहीं है. इस पर अदालत ने कहा कि कोई भी अभिभावक अपने बच्चे के खिलाफ ऐसी भद्दी टिप्पणी सुनेगा, तो उसकी यही प्रतिक्रिया होगी.

याचिकाकर्ता अग्रिम जमानत का हकदार नहीं

अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कहा, ‘मामले के तथ्यों तथा परिस्थितियों को देखते हुए और आरोपों की प्रकृति को देखते हुए मेरा मानना है कि याचिकाकर्ता अग्रिम जमानत का हकदार नहीं है.’ अदालत ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता (आरोपी) मामले के जांच अधिकारी के सामने आत्मसमर्पण करता है, तो उसे उसी दिन न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा. अदालत ने कहा, ‘मजिस्ट्रेट मामले के गुण-दोष को ध्यान में रखते हुए बिना किसी अनुचित देरी के याचिकाकर्ता द्वारा दायर किसी भी आवेदन पर विचार करेंगे.’ इसे भी पढ़ें – जज">https://lagatar.in/judge-uttam-anand-death-case-hc-directs-whatsapp-india-head-to-form-a-party-know-the-reason/">जज

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