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26 साल पहले शराब पीने के आरोप में बर्खास्त सिपाही की सेवा बहाल करने का आदेश

झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस कांस्टेबल गोपाल राम को बड़ी राहत देते हुए उनकी बर्खास्तगी को रद्द कर दिया है और पुनः सेवा में बहाल करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि सेवा से बर्खास्त करना सबसे कठोर सजा है, इसलिए बिना ठोस प्रमाण के यह उचित नहीं है.
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  • मेडिकल टेस्ट में शराब पीने का नहीं मिला था प्रमाण
  • सेवा से कर दिया गया बर्खास्त
  • सेवा से बर्खास्त करना सबसे कठोर सजा
  • पुनः सेवा में बहाल करने का आदेश

Ranchi :  झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस कांस्टेबल गोपाल राम को बड़ी राहत देते हुए उनकी बर्खास्तगी को रद्द कर दिया है और पुनः सेवा में बहाल करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि सेवा से बर्खास्त करना सबसे कठोर सजा है, इसलिए बिना ठोस प्रमाण के यह उचित नहीं है.

 

हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने पाया कि पूरे आरोप का आधार “शराब पीना” था, लेकिन कोई मेडिकल जांच नहीं हुई और ना ही शराब पीने का कोई ठोस प्रमाण दिया गया.  


क्या था मामला

गोपाल राम (कांस्टेबल) को 1 मार्च 2000 में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था. उसकी नियुक्ति 15 जून 1988 को कांस्टेबल पद पर आर्म्ड गार्ड, गोविंदपुर पुलिस स्टेशन में हुई थी. आरोप था कि 1 मार्च 1997 को जब वह गोविंदपुर पुलिस स्टेशन में कार्यरत था, तब उन्होंने शराब के नशे में अपने वरिष्ठ अधिकारी से दुर्व्यवहार किया और हंगामा किया.

 

विभागीय कार्रवाई के बाद 1 मार्च 2000 में बर्खास्तगी, 2001 में अपील खारिज की गई और वर्ष  2002 में उसकी पुनरीक्षण याचिका भी खारिज कर दी गई. याचिकाकर्ता की दलील थी कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं मिला. गवाहों से जिरह (cross-examination) का अवसर नहीं दिया गया.

 

शराब पीने का कोई मेडिकल प्रमाण भी नहीं था. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के Munna Lal vs Union of India फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बिना ठोस सबूत के इतनी बड़ी सजा नहीं दी जा सकती. प्रार्थी की बर्खास्तगी, अपील और पुनरीक्षण तीनों आदेश रद्द (quash) कर दिए गए.

 

इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि गोपाल राम को सेवा में पुनः बहाल (reinstatement) किया जाए. यदि आवश्यक हो, तो सजा पर पुनर्विचार कर नया आदेश दे सकते हैं. बैक वेज (वेतन) पर निर्णय बाद में लिया जाएगा. 

 

 

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