Ranchi : देवघर जिले में चौकीदार पदों पर नियुक्ति को लेकर अभ्यर्थियों की ओर से दायर याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आनंदा सेन की कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार को प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है.
कोर्ट ने कहा कि देवघर में चौकीदार नियुक्ति प्रक्रिया में आगे की कोई भी नियुक्ति इस रिट याचिका के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगी. याचिकाकर्ता को ओर से अधिवक्ता संकल्प गोस्वामी ने पैरवी की.
दरअसल यह मामला वर्ष 2024 में जारी विज्ञापन संख्या 1/2024 के तहत देवघर जिले में चौकीदार पदों पर नियुक्ति से संबंधित है. उक्त विज्ञापन के माध्यम से कुल 286 पदों पर नियुक्ति प्रस्तावित थी. चयन प्रक्रिया दो चरणों लिखित परीक्षा (50 अंक) और शारीरिक दक्षता परीक्षा (20 अंक) में आयोजित की गई, जिसमें लिखित परीक्षा में न्यूनतम 30 प्रतिशत अंक अनिवार्य थे.
मामले में याचिकाकर्ताओं का कहना है कि लिखित परीक्षा के बाद उनके व्यक्तिगत अंक सार्वजनिक नहीं किए गए, जिससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्न खड़े होते हैं. उनका कहना है कि आधिकारिक उत्तर कुंजी के आधार पर स्वयं आकलन करने पर कुछ अभ्यर्थियों के अंक अपने-अपने वर्गों के अंतिम चयनित अभ्यर्थियों से अधिक प्रतीत होते हैं, फिर भी उन्हें शारीरिक परीक्षा के लिए नहीं बुलाया गया.
याचिका में यह भी कहा गया है कि कुछ अभ्यर्थियों ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) श्रेणी में आवेदन किया था और आवश्यक प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किए थे. इसके बावजूद उन्हें सामान्य वर्ग में डाल दिया गया, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति प्रभावित हुई. देवघर में अब भी कई पद रिक्त बताए जा रहे हैं.
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया है कि झारखंड के अन्य जिलों जैसे कोडरमा, रामगढ़ और पूर्वी सिंहभूम जिले में समान परिस्थितियों में द्वितीय मेरिट सूची जारी कर कट-ऑफ अंक में समायोजन किया गया, ताकि रिक्त पदों को भरा जा सके. उनका तर्क दिया कि देवघर में भी इसी प्रकार की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए.

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