- स्टेट बार काउंसिल की ओर से लाइसेंस 2 साल के लिए सस्पेंड किए जाने को दी है चुनौती
Ranchi : हाइकोर्ट के अधिवक्ता महेश तिवारी को रांची सिविल कोर्ट से 2 साल की सजा सुनाए जाने पर झारखंड स्टेट बार काउंसिल की ओर से उनका लाइसेंस सस्पेंड करने को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट में हुई.
इस मामले में महेश तिवारी को हाइकोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए लाइसेंस सस्पेंड करने के आदेश पर रोक लगाई है. साथ ही कोर्ट ने इस मामले में झारखंड स्टेट बार काउंसिल को जवाब दाखिल करने को कहा है.
बता दें कि महेश तिवारी ने उनका वकालत लाइसेंस दो वर्षों के लिए निलंबित किये जाने को हाइकोर्ट में चुनौती दी है.
दरअसल, झारखंड स्टेट बार काउंसिल की ओर से की गयी कार्रवाई रांची की निचली अदालत से उन्हें दो वर्ष की सजा मिलने के बाद की गयी थी.
बार काउंसिल के अध्यक्ष राजेंद्र कृष्ण के हस्ताक्षर से जारी आदेश में कहा गया है कि एडवोकेट एक्ट की धारा 24ए के प्रावधानों के तहत, नैतिक पतन से जुड़े मामलों में सजा होने पर संबंधित अधिवक्ता का लाइसेंस निलंबित किया जाता है.
काउंसिल ने अपने आदेश में महिपाल सिंह राणा बनाम उत्तर प्रदेश मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि धारा 24ए के प्रावधान वकीलों पर भी लागू होते हैं. आदेश के अनुसार सजा की तिथि से अगले दो वर्षों तक महेश तिवारी किसी भी अदालत में अधिवक्ता के रूप में पेश नहीं हो सकेंगे.
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