Lagatar Desk
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए बबलू राय की आजीवन कारावास की सजा निलंबित कर दी. साथ ही उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया.
कोर्ट में नंदलाल राय उर्फ बबलू को भाजपा का सक्रिय कार्यकर्ता बताता गया. इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश सिद्धार्थ और न्यायाधीश विनानी कुमार द्विवेदी की पीठ ने बबलू राय की जमानत सह सजा स्थगित करने की याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया.
बनारस के जिला एवं सत्र न्यायालय ने बबलू राय को हत्या के एक मामले (ST-176/2017) में आजीवन कारावास की सजा सुनायी थी. वह 15 अप्रैल 2025 से हत्या के मामले में सजा काट रहा था.
बबलू राय ने जिला एवं सत्र न्यायालय द्वारा दी गयी सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी. बबलू की ओर से सजा के ख़िलाफ़ अपील दायर करते हुए कोर्ट ने जमानत पर रिहा करने और सजा स्थगित करने का अनुरोध किया था.
मामले की सुनवाई के दौरान बबलू की ओर से कहा गया कि वह कानपुर में हुई हत्याकांड का नामजद अभियुक्त नहीं थी. उसे गलत तरीके से हत्या का मामले में सजा दी गयी है.
एक गवाह ने चश्मदीद बन कर उसके खिलाफ झूठी गवाही दी थी. वह एक राजनीतिक कार्यकर्ता है. सजा से पहले वह भारतीय जनता पार्टी का एक सक्रिय कार्यकर्ता था.
वह 2027 में होने वाले विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहता है. संभवतः उसे भाजपा से टिकट मिलेगा. इसलिए कोर्ट उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दे.
बबलू राय की तरफ से यह भी मांग की गई कि चुनाव लड़ने के लिए उसे दी गयी आजीवन कारावास की साज को स्थगित कर दिया जाए. सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश के वकील ने बबलू को जमानत पर रिहा करने का विरोध किया.
न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद बबलू द्वारा सजा के खिलाफ दायर की गयी याचिका के निष्पादन तक सत्र न्यायालय द्वारा दी गयी सजा निलंबित कर दी है. साथ ही उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के कई मामले में दिये गये फैसलों का हवाला दिया गया.
अदालत ने बबलू पर जमानत के दौरान अपनी संपत्ति की खरीद बिक्री पर रोक लगा दी है. इसके अलावा निचली अदालत द्वारा सजा के साथ लगायी गयी दंड की राशि का 50% जमा करने का आदेश दिया है.