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होलिका दहन 3  को...जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Lagatar desk  : होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. पौराणिक मान्यता के अनुसार भक्त प्रह्लाद की भक्ति और आस्था की विजय तथा होलिका के दहन की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है. 

 


इस साल होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 

 


फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर हर साल होलिका दहन मनाया जाता है. वाराणसी पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को शाम 5 बजकर 56 मिनट से प्रारंभ होगी और 3 मार्च को शाम 5 बजकर 8 मिनट पर समाप्त होगी.

 


हालांकि इस बार होलिका दहन पर भद्रा का साया रहेगा. भद्रा दो मार्च की शाम 5:18 बजे से लगेगा, जो 2/3 मार्च की रात्रि 4:56 बजे तक रहेगा. ऐसे में होलिका दहन तीन मार्च अहले सुबह 4.57 बजे से सूर्योदय से पहले तक किया जाएगा.

 


होलिका दहन की संपूर्ण पूजा विधि

 


शाम को स्नान करके स्वच्छ और शुद्ध वस्त्र धारण करें.

परिवार के साथ होलिका स्थल पर जाएं.

होलिका के सामने जल से आचमन करें.

भगवान विष्णु और भक्त प्रह्लाद का स्मरण करें.

रोली, अक्षत (चावल) और फूल अर्पित करें.

कच्चा सूत (मौली) होलिका पर लपेटें.

हल्दी, गुलाल और गुड़ चढ़ाएं.

नारियल और गेहूं या जौ की बालियां अर्पित करें.

शुभ मुहूर्त में अग्नि प्रज्वलित करें.

मान्यता है कि होलिका की अग्नि में अपनी नकारात्मक सोच और बुराइयों को भी समर्पित कर देना चाहिए, ताकि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सके.

 


पूजा सामग्री की सूची

रोली और अक्षत

फूल और माला

हल्दी और गुलाल

कच्चा सूत (मौली)

गुड़

नारियल

गेहूं या जौ की बालियां

 


सही दिशा का महत्व

 


होलिका दहन करते समय दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए.

संभव हो तो होलिका को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके जलाएं.

पूजा करते समय भी पूर्व दिशा की ओर मुख करना शुभ माना जाता है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सही दिशा में पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और शुभ फल प्राप्त होते हैं.

 


होलिका की परिक्रमा का महत्व

 


पूजा के बाद होलिका की परिक्रमा करना अत्यंत आवश्यक माना गया है.

परिवार के सभी सदस्य मिलकर कम से कम 3 या 7 बार परिक्रमा करें.

भगवान का नाम लेते हुए परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें.

मान्यता है कि इससे रोग, दोष और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं. महिलाएं विशेष रूप से परिवार की रक्षा और खुशहाली के लिए परिक्रमा करती हैं.

 

दहन के बाद राख का क्या करें?

 


होलिका दहन के बाद बची हुई राख को पवित्र माना जाता है.

अगले दिन सुबह राख को घर लाकर माथे पर तिलक के रूप में लगाना शुभ होता है.

कुछ लोग राख को घर के मुख्य द्वार या पूजा स्थान पर रखते हैं.

खेतों में राख डालना भी शुभ माना जाता है, जिससे फसल अच्छी होने की मान्यता है.

 

 

 

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