हर चौक-चौराहे पर चना बेच रहे किसान
हजारीबाग में आज शायद ही ऐसा कोई चौक चौराहा हो, जहां किसान चना बेचते नजर ना आए. हजारीबाग में चना को स्थानीय भाषा में लोग बूट झंगरी कहते हैं. होलिका दहन के समय इस चने को आग में डालने की परंपरा है. सुबह होली शुरू होने के पहले परिवार के लोग प्रसाद स्वरूप उसे खाते हैं.नए साल का नया निवाला
कहा जाए तो पहला निवाला नया साल का होता है. हजारीबाग के प्रसिद्ध महावीर स्थान के पुजारी कार्तिक पांडेय भी बताते हैं कि यह परंपरा है. जिसका निर्वहन हम लोग करते आ रहे हैं. पहली फसल को अग्नि देवता को समर्पित करते हैं. इस कारण इसका विशेष महत्व भी है.एक दिन में लाखों की कमाई
हर घर में आज के दिन लोग चना खरीद कर लाते हैं. हजारीबाग के विभिन्न चौक-चौराहों पर किसान बेचते हुए भी नजर आते हैं. लाखों रुपए के चने एक दिन में बिक जाते हैं. किसान पच्चू महतो कहते हैं कि यह परंपरा है. हम लोग होलिका दहन के दिन अपने खेतों से चना लाकर बाजार में बेचते हैं. शाम होते-होते पूरा चना बिक जाता है.पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही परंपरा को जीवित रखने की जिम्मेवारी हमारी : शंकर प्रसाद
स्थानीय ग्राहक शंकर प्रसाद शर्मा बताते हैं कि यह परंपरा हम लोग सदियों से निभा रहे हैं. उनके पिताजी अगजा में चना जलाया करते थे. आज हम लोग चना जला रहे हैं. यह कहा जाता है कि बहुत बीमारी का इलाज भी है. सिर्फ हजारीबाग ही नहीं बिहार समेत कई जिले में यह भी परंपरा देखने को मिलती है. रीति-रिवाज ने ही हमारी सभ्यता-संस्कृति को जीवित रखा है. हमारा भी यह दायित्व है कि हम पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही परंपरा को जीवित रखें. इसे भी पढ़ें : उमेश">https://lagatar.in/umesh-pal-murder-case-vijay-alias-usman-chowdhary-was-killed-in-a-police-encounter-the-first-shot-was-fired-at-pal/">उमेशपाल हत्याकांड : पुलिस एनकाउंटर में मारा गया विजय उर्फ उस्मान चौधरी, पाल पर चलायी थी पहली गोली [wpse_comments_template]

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