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माननीयों, आपको सुनना ही पड़ेगा, जवाब देना ही होगा

NEET परीक्षा पेपर लीक के बाद दिल्ली में हजारों छात्र सड़क पर हैं. लाठी चल रहे हैं. पुलिस के साथ सिविल ड्रेस में मौजूद लाठी से लैस लोग छात्रों को पीट रहे हैं. पर छात्र हट नहीं रहे हैं. बिहार के पटना में छात्र सड़क पर हैं. बुधवार को आंसू गैस के गोले उनपर छोड़े गये. लाठीचार्ज किया गया. झारखंड में भी छात्र जेपीएससी कार्यालय का घेराव कर रहे हैं.
 
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NEET परीक्षा पेपर लीक के बाद दिल्ली में हजारों छात्र सड़क पर हैं. लाठी चल रहे हैं. पुलिस के साथ सिविल ड्रेस में मौजूद लाठी से लैस लोग छात्रों को पीट रहे हैं. पर छात्र हट नहीं रहे हैं. बिहार के पटना में छात्र सड़क पर हैं. बुधवार को आंसू गैस के गोले उनपर छोड़े गये. लाठीचार्ज किया गया. झारखंड में भी छात्र जेपीएससी कार्यालय का घेराव कर रहे हैं.


अलग-अलग जगहों पर छात्रों का यह आंदोलन बता रहा है कि मोबाइल के स्क्रिन पर उंगलियां चलाने वाला युवा सड़क पर जम गए तो सत्ता को दिक्कत होगी. युवा, जिन्हें यह कहा जाने लगा था कि वह 30 सेकेंड के रील वाले हैं, वह नारे लगा रहे हैं. पुलिस के डंडे उन्हें भागने को मजबूर नहीं कर रहा है. यह सत्ता के लिए खतरे की घंटी है.


दरअसल, पिछले कुछ सालों से राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं (नामांकन व अस्थायी नौकरी के) के पेपर लीक समेत कई तरह की अनियमतता की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं. युवा यह मानने लगे हैं कि सरकारें नौकरी देना ही नहीं चाहतीं. मेडिकल-इंजीनियरिंग के लिए उन्हें योग्य युवा नहीं चाहिए. उन्हें सिर्फ अपनी तिजोरी भरने से मतलब है.


युवा आक्रोशित हैं. कॉलेजों में पढ़ाई नहीं है. यूनिवर्सिटीज में पढ़ने का माहौल नहीं बचा. इन सबसे किसी तरह निकल कर जब वह जॉब खोजने निकलते हैं, तो उन्हें पेपर लीक मिलता है. महीनों इंतजार के बाद भी रिजल्ट नहीं निकलता और एक दिन पता चलता है कि इग्जाम कैंसल हो गया.
युवाओं का दर्द समझना हो तो उनसे बात करिये. निजी विश्वविद्यालयों में लाखों रुपये खर्च कर डिग्री हासिल करने वाले छात्र बड़े शहरों में मौके की तलाश में भटक रहे हैं. परिवार के सामने आने में उन्हें शर्म महसूस हो रहा है. उनकी मजबूरी का फायदा उद्योगपति उठा रहे हैं. व्यवस्था में हर तरफ भ्रष्टाचार है. छात्रों को इस सबसे बचाना होगा. उन्हें भरोसा दिलाना होगा कि उनके साथ न्याय होगा.  


भारत में युवाओं की फौज बहुत बड़ी है. तकरीबन 36 से 38 करोड़. अभी उनका सिर्फ मोहभंग हुआ है, वो आपके खिलाफ नहीं हुए हैं. उन्हें भरोसा चाहिए. अफसोस है सत्ता भरोसा दिलाने के बदले डंडे से पीट रही है. 


अगर यह सब नहीं रुका और ये युवा आप माननीयों के खिलाफ हो गए तो कोई भी कैश ट्रांसफर आपको सत्ता से बाहर होने से नहीं बचा पायेगा. इसलिए जरूरी है कि सरकारें व माननीय युवाओं की सुनें. जिम्मेदारों पर कार्रवाई करें और यह सुनिश्चित करें, भरोसा दिलाये कि भविष्य में ना पेपर लीक होगा, ना सीटें बिकेंगी. जो युवा योग्य होगा, उसे नामांकन व नौकरी मिलेगी.

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