चुनावी बिसात पर मोहरे तो बहुत चले जाते हैं, लेकिन कुछ शह-मात राजनीति की दिशा बदल देती है. बिहार विधान परिषद चुनाव में हाई प्रोफाइल पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से अपनी ही पार्टी के नेता नीरज कुमार के खिलाफ मोर्चा खोले मोकामा के विधायक अनंत सिंह राजनीतिक बदला चुकाने की जिद में बुरी तरह पिट गये. पार्टी से निकाले गये. विधायकी जाने की तलवार अलग ही लटक रही. जदयू ने स्पीकर से उनकी सदस्यता रद्द करने की स्पीकर से सिफारिश की है. दलविरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी ने यह कदम उठाया है. इधर नीरज चुनाव भी जीत गये.
अनंत सिंह के साथ उनकी पत्नी पूर्व विधायक नीलम देवी को भी पार्टी से निष्कासित किया गया है. इस कार्रवाई के बाद नीलम देवी को अब 20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति से भी हटा दिया गया है. इससे उनका उप-मंत्री (डिप्टी मिनिस्टर) का दर्जा छिन गया है.
चुनाव को लेकर अनंत सिंह की प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसमें उन्होंने कहा है, "मतगणना पूरी हो गई है और हम हार गए हैं. अब इस पर क्या चर्चा करनी है? क्या हमने किसी दुकान से वोट खरीदे थे? क्या हमने वोट तौलकर लाए थे? जनता ही सबसे बड़ी ताक़त है और जनता ही मालिक है. जिन्हें जनता के वोट मिले, वे जीत गये, जिन्हें नहीं मिले वे हार गये. अब और क्या कहना है" नीरज कुमार की जीत लगभग तय होने पर उन्हें बधाई देने के सवाल पर उन्होंने कहा, "मैं कभी पार्टी से नाराज़ नहीं रहा हूं. मैं उन्हें बधाई क्यों दूं? अब और क्या कहने को रह गया है. देखते हैं कि वह फ़ोन करते हैं या नहीं."

अनंत सिंह की तस्वीर
इस बीच अनंत सिंह के समर्थन वाले कैंडिडेट के हारने पर जेडीयू नेता नीरज कुमार ने कहा, "जैसी करनी वैसी भरनी." पटना से एमएलसी का चुनाव जीतने के बाद नीरज कुमार ने कहा, "मैं इस जीत का श्रेय नीतीश कुमार, निशांत कुमार, सम्राट चौधरी, उपेंद्र कुशवाहा, जीतन राम मांझी और चिराग पासवान को देता हूं. जीत का जश्न मनाना अभी बाकी है."
नतीजों को लेकर बुधवार दोपहर नीरज कुमार का मीडिया में एक और बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने तंज कसते हुए कहा, 'कहां ही रे गुंजन, ले जो मिठईया (कहां हो गुंजन, मिठाई ले जाओ). उनके इस बयान को तंज के के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि मोकामा विधायक लगातार यह कह रहे थे कि नीरज कुमार की हार तय है. इसलिए वह लाखों मिठाई बनवा रहे हैं.
राजनतिक अदावत पुरानी
मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह की पार्टी नेता नीरज कुमार के साथ राजनीतिक अदावत पुरानी है. इस बार विधान परिषद के चुनाव से ठीक पहले अनंत सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. दोनों के बीच बयानों के तीर चले. यह अदावत क्लाइमेक्स पर तब पहुंचा, जब अनंत सिंह जनसुराज के उम्मीदवार डॉ अनुज सिंह का नामांकन कराने पहुंचे थे. इसके साथ ही दावे ठोंकते नजर आए कि उनका मकसद नीरज कुमार को हराना है. वह इसलिए कि नीरज कुमार ने हमें चुनाव हराने के लिए कई मौके पर दांव चले हैं. हालांकि, अनंत कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि वे जदयू के खिलाफ कोई काम नहीं कर रहे हैं.
गौरतलब है कि साल 2015 में जब नीतीश कुमार ने अनंत सिंह को टिकट नहीं दिया था और नीरज सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया, तब से दोनों के बीच कटुता है. पटना की मोकामा विधानसभा सीट पर निर्दलीय चुनाव लड़कर तब अनंत सिंह ने नीरज कुमार को हरा दिया था. वहां से अनंत सिंह का नाम इस विधानसभा सीट से जुड़ गया. बीते विधानसभा चुनाव (2025) में दुलारचंद यादव की हत्या के आरोप के चलते जेल के अंदर होने के बाद भी अनंत सिंह ने मोकामा से जीत दर्ज की. शुरूआत में अनंत सिंह के नीतीश से रिश्ते खटास भरे ज़रूर रहे. नीतीश के सत्ता में आने के बाद पहली बार 2015 में ही पुटुस हत्याकांड में अनंत सिंह जेल गए. 2017 में जेल से लौटने के बाद उन्होंने जेडी (यू) से नाता तोड़ लिया और लालू यादव की राजद से नज़दीकी बढ़ाई.
अनंत सिंह को लेकर जब भी कयासों का दौर चलता कि मोकामा की राजनीति में वे मुश्किलों में घिर गये हैं, वे चुनाव जीतते रहे. भले ही उनकी पार्टी बदलती रही. टिकट कटता रहा. जेल का दरवाजा खुलता- बंद होता रहा, अनंत सिंह को मोकामा की जनता उन्हें बाजीगर बनाती रही.

जेडीयू नेता नीरज कुमार
आरोपों पर नीरज कुमार का पलटवार
चुनाव के दौरान ही अनंत सिंह ने आरोप लगाया कि नीरज कुमार ने ही मेरे घर में एके 47 रखवाकर फंसाया और जेल भेजवाया. पार्टी से टिकट मिलने पर भी मेरा विरोध करता रहा. इसके साथ ही अनंत सिंह ने इस मामले की जांच की मांग की. साथ ही कहा कि पार्टी नेताओं को बुलाया जाना चाहिए और जरूरत पड़े तो नार्को टेस्ट भी कराया जाना चाहिए.
इन आरोपों पर एमएलसी नीरज कुमार ने कहा था “बहुत लोग हमारे ऊपर आरोप लगा रहे हैं. अरे हम तो अपराधियों के लिए कहर हैं. गंगा में घुस कर भी कोई कहेगा तो लोग नहीं मानेंगे. साथ ही एके 47 रखवाने के सवाल पर कहा, अगर उनके पास प्रमाण है तो कोर्ट जाएं. कोर्ट जाने में क्या दिक्कत है. अनंत सिंह अनर्गल आरोप लगाते हैं.” इस दौरान नार्कों टेस्ट के सवाल पर तब नीरज कुमार ने कहा था,” इसके लिए कोर्ट जाएं और हिम्मत है तो आवेदन दें. मेरा जीवन पारदर्शी है. मैंने अपने जीवन में ऐसे घिनौने काम नहीं किए हैं.”
बयानबाजी के तल्खियों के बीच अनंत सिंह को मनाने का दौर भी चला, लेकिन वे अड़े रहे. नीरज कुमार के साथ उनका झगड़ा सुलझाने का जिम्मा केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को दिया गया था. लेकिन रंज खत्म नहीं हुआ. इस बीच नीरज कुमार का एक बयान भी सुर्खियों में रहा, “हम नीतीश कुमार के साथ बचपन से रहे हैं. कितने लोग पार्टी बदलते रहे. हम कही नहीं गए. हम ये अनगर्ल आरोप बर्दाश्त नहीं करेंगे.”
नीतीश कुमार के करीबी माने जाते हैं
बिहार की राजनीति में जदयू नेता नीरज कुमार को नतीश कुमार का करीबी माना जाता है. जाहिर तौर पर नीरज की जीत सुनिश्चित कराने के लिए जदयू ने जोर लगाना शुरू किया. बताया जाता है कि निशांत कुमार भी अनंत सिंह के बगावती रवैये से अंदर ही अंदर खफा थे. अलबत्ता निशांत कुमार ने नीरज के समर्थन में प्रचार भी किया. नीरज कुमार को भाजपा की भी मदद मिलती रही. बांकीपुर उपचुनाव में जनसुराज के प्रशांत किशोर से मिली हार को लेकर बीजेपी की नजरें इस बात पर लगी थी कि एमएलसी के चुनाव में भी कम से कम पटना स्नातक सीट से जनसुराज हावी न हो जाए. नीरज कुमार जीत को लेकर इस बात पर भी आशान्वित रहे कि उन्हें नीतीश कुमार का आशीर्वाद प्राप्त है. बाकी समीकरणों को साधने का हुनर उनके पास भी है. सबकी निगाहें चुनाव के नतीजों पर टिकी रहीं.
इससे पहले 24 अक्टूबर को जेडी (यू) के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने अनंत सिंह के पार्टी निष्कासन के संबंध में कार्यालय आदेश जारी किया. आदेश के अनुसार, पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करने, शीर्ष नेतृत्व के प्रति अमर्यादित एवं अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने और विधान परिषद चुनाव में पार्टी प्रत्याशी के विरुद्ध काम करने के कारण अनंत सिंह पर कार्रवाई की गई है.
पार्टी का आरोप है कि अनंत सिंह ने जेडी (यू) प्रत्याशी के विरोध में प्रचार किया और दूसरे दल के प्रत्याशी का समर्थन किया. इसी आधार पर उनकी प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करते हुए उन्हें छह वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है. इस कार्रवाई से बिहार और जदयू की राजनीति में एक संकेत साफ तौर पर उभरे कि अनंत सिंह नीरज कुमार और जदयू की बिछायी बिसात पर पिट गये और मोकामा की राजनीति में भले ही उनकी धाक है, लेकिन हर जगह वे दखल नहीं डाल सकते. अब अनंत सिंह को जो सैटबैक मिला है उससे वे कैसे उबरते हैं, यह देखा जाना बाकी है.
