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अहिंसक आंदोलनकारी हिंसक कैसे हो गए?

  • पहले भी चार दिनों तक सरकारी कार्यालयों पर टाना भगतों का रहा था कब्जा
  • उस वक्त धारा 107 लागू करना तक प्रशासन ने जरूरी नहीं समझा
Sunil Kumar Latehar :  टाना भगतों के आंदोलन पर पुलिस व प्रशासन बेबस क्यों है? इसका जवाब लातेहार की जनता ढूंढ रही है. एक ओर जहां जिला प्रशासन का इंटेलिजेंस ब्यूरो पूरी तरह से फेल साबित हुआ है, वहीं 26 से 30 अप्रैल तक लगातार चार दिनों तक जिले का सभी कार्यालयों में तालाबंदी करने वाले टाना भगतों के विरुद्ध धारा 107 की कार्रवाई भी नहीं की गई. अहिंसक आंदोलन करने वाले हिंसक कैसे हो गए? इसके पीछे कौन व्यक्ति या संस्था है, यह चिंतनीय है. इनका मनोबल काफी बढ़ा और न्यायपालिका को ही आंदोलन की जद में ले लिया. गत सोमवार को घंटों वरीय अधिवक्ताओं ने आंदोलनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने. न्यायपालिका को दुकानदारी की संज्ञा दे डाली. इसे भी पढ़ें : ईडी">https://lagatar.in/revealed-in-ed-investigation-laundering-of-a-large-part-of-1000-crores-earned-from-illegal-mining-done-through-amit-agarwals-companies/">ईडी

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आंदोलनकारियों ने जिले के वरीय अधिकारियों को यहां तक कह डाला कि किसके आदेश से कोर्ट कचहरी यहां काम कर रही है, जबकि पांचवीं अनुसूची के तहत इस क्षेत्र में उनका शासन प्रशासन है. वे अपनी असंवैधानिक मांग पर कायम रहे. पिछले सप्ताह से टाना भगतों का दल जिला मुख्यालय के विभिन्न स्थानों पर एकत्रित होकर बैठकें कर रहा था. गुमला एवं लोहरदगा से आये इनके प्रतिनिधियों ने इस आंदोलन की पूरी रूपरेखा तैयार की थी. फिर भी जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी. जिले में इंटेलिजेंस के पीछे भारी खर्च किया जा रहा है, लेकिन इस मामले में इंटेलिजेंस फेल साबित हुआ है. व्यवहार न्यायालय में घटित घटना से लातेहारवासी दहशत में हैं. इसे भी पढ़ें :  कोर्ट">https://lagatar.in/failure-of-ruckus-intelligence-in-court-high-court/">कोर्ट

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