शव को नहीं निकाला जा सका
खदान से शव निकाल पाने में सीसीएल प्रबंधन असफल रहा. वहीं बेबस पिता खुलकर आंसू भी नहीं बहा पा रहा है. पिता खदान के पास जाता है कि इस उम्मीद से कि उसका बेटा जिंदा लौट आए नहीं तो उसका शव तो मिल जाये. लेकिन तीन दिनों तक मायूसी ही हाथ लगी. हारकर बाप ने बेटे का पुतला बनाकर अंतिम संस्कार कर दिया. घटना की जानकारी मिलने के बाद सीसीएल की रेस्क्यू टीम 19 अगस्त को उक्त खदान में गई और लापता व्यक्ति को ढूंढने की कोशिश की. मगर वर्षों से बंद खदान की खतरे को देखते हुए टीम ने रिस्क नहीं लिया और वापस लौट आयी. इधर पिछले 3 दिनों से लगातार बारिश के कारण भी स्थिति गंभीर हो गई. इसे भी पढ़ें-झारखंड">https://lagatar.in/state-will-always-remember-syed-sibte-razis-work-as-governor-of-jharkhand-hemant/">झारखंडके राज्यपाल के तौर पर सैयद सिब्ते रजी के कार्य को राज्य सदा याद रखेगा : हेमंत
आखिरकार पुतला बनाकर किया अंतिम संस्कार
तीन दिन तक मलवे में दबे होने और बाहर नहीं निकल आने की स्थिति में परिजन की आस टूट गई है. शनिवार को परिजनों ने उसका पुतला बनाकर अंतिम संस्कार कर दिया. दरअसल उस व्यक्ति के साथ कुछ और लोग खदान से कोयला निकालने गए थे. उनके साथियों ने जिस प्रकार की दास्तान बताई है उससे उसकी जीवित होने की संभावना नहीं है. बता दें उस व्यक्ति की उम्र लगभग 45 साल थी, उसका एक बेटा है, वहीं माता पिता अभी जीवित हैं. इसे भी पढ़ें-धनबाद">https://lagatar.in/dhanbad-hands-and-feet-of-people-breaking-on-the-road-of-aina-islampur/">धनबाद: ऐना इस्लामपुर की सड़क पर टूट रहे लोगों के हाथ-पांव [wpse_comments_template]

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