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कितना बदल गया इंसान! स्विस बैंक, काला धन, अखबार, टीवी -तब और अब

Surjit Singh

खबर है - स्विस बैंकों में दुनिया भर के ग्राहकों की जमा राशि में 11 प्रतिशत की बढ़ेतरी हुई है. इसी के साथ खबर है कि भारतीय लोगों का पैसा तीन गुणा बढ़कर 37,600 करोड़ रुपया हो गया है. हम भारत के लोगों को यह बताया जाता रहा है, हम यह मानते रहे हैं कि स्विस बैंक, मतलब काला धन होता है. यानी ब्लैक मनी. इसे लेकर हम सालों तक मुखर रहे हैं.

 

12 साल पहले तक स्विस बैंकों में भारतीयों की जमा राशि एक बड़ा मुद्दा हुआ करता था. अब नहीं. तब खूब चर्चा होती थी. अखबार में, टीवी पर, आपस में. हर जगह. अब एक चुप्पी है. सन्नाटा है. 19 जून को आयी खबर को क्या आपने पढ़ा ? पहले पन्ने पर या 15वें या19वें पन्ने पर ? ब्रेकिंग न्यूज में देखा ? कहीं कोई डिबेट ? नहीं. मीडिया की चुप्पी को समझिए. मीडिया चुप है, इसलिए आप-हम भी चुप हैं. ना व्हाट्सएप पर कोई मैसेज है, ना सोसाइटी में कोई चर्चा. 

 

अब चलते हैं एक दशक पहले...

2013-2014 (चुनाव प्रचार के दौरान):  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री थे), जो उस समय भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे, उन्होंने स्विस बैंकों में जमा काले धन को वापस लाने का वादा किया. उन्होंने 22 दिसंबर 2013 को एक भाषण में कहा, "एक बार ये जो चोर-लुटेरों के पैसे विदेशी बैंकों में जमा हैं ना, उतने भी हम रुपये ले आए, तो हिंदुस्तान के एक-एक गरीब आदमी को मुफ्त में 15-20 लाख रुपये यूं ही मिल जाएंगे." यह बयान उस समय काफी चर्चित हुआ और भाजपा ने इसे 2014 के चुनावों में प्रमुख मुद्दा बनाया.

 

एक अन्य चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी दावा किया कि उनकी सरकार बनने पर 100 दिनों के भीतर काला धन वापस लाया जाएगा.

 

इनकी भी सुनिए...

पीयूष गोयल (वित्त मंत्री, 2018) : 29 जून 2018 को तत्कालीन वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था- स्विस बैंक में रखे पैसे को काला धन कहना मूर्खता है. यह बयान उस समय आया जब स्विस बैंकों में भारतीयों की जमा राशि में 50% की वृद्धि की खबर आई थी. यह बयान मोदी के 2013 के दावे से उलट माना गया, जिसे विपक्ष ने आलोचना का आधार बनाया था.

 

एक दशक पहले तक मीडिया में स्विस बैंक और उसमें जमा राशि की खूब चर्चा होती थी. यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा हुआ करता था. सत्ता में बैठी पार्टी को निशाना बनाया जाता था. अखबारों में प्रमुखता से खबरें होती थीं. टीवी पर डिबेट चलते थे. आम लोगों के बीच भी इसकी खूब चर्चा होती थी. लेकिन अब. सबकी जुबान बंद है.

 

भाजपा के नेताओं के लिए तब यह बड़ा मुद्दा था, अब मामूली बात. तब 100 दिन में काला धन वापस लाने की बात थी, अब इसकी चर्चा भी नहीं. तो क्या आम लोगों को यह नहीं समझना चाहिए कि भ्रष्टाचार, काला धन, ब्लैक मनी, यह भाजपा के लिए सिर्फ चुनाव जीतने का जरिया है. 

 

ऐसा नहीं है कि अखबारों में, टीवी चैनलों पर खबर नहीं है. बिल्कुल है. पर ऐसे, जैसे बताने से अधिक छिपाने की कोशिश की जा रही हो. वैसे कुछ लोग इस पर भी गर्व कर सकते हैं. कह सकते हैं- देखा, स्विस बैंक में भी हमारा डंका बज रहा है. 

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